कपड़े उतरवानें वाला नहीं, सच्चा प्यार करनें वाला चाहिए

आज के समय में जिस तरह हर युवा - युवती के बीच " प्यार " शब्द कों समझते हैं। 

क्या वों सच्चा प्यार है???? 

जबाब हैं - नहीं 

आखिर ऐसा क्यों लेखिका बोल रही हैं ऐसा सवाल सभी के मन में जरूर आ रहा होगा।  आप सभी कों बता दें प्यार पहले के समय में भी किया जाता था और आज भी किया जा रहा है। मगर अभी प्यार सें छला जा रहा है। 

वास्तविकता यह है कि लोग आज जरूरत के लिए प्यार करते हैं। मुझे कोचिंग आनें-जानें में दिक्कत हों रही थी तों बाँयफ्रेड बना लिए अब वों हर रोज उसें लेकर जाता और लेकर वापस आता है। क्या यह प्यार हैं नहीं जरूरत थी। अब लड़का समझ रहा है कि लड़की प्यार कर रही हैं तों वों लड़का भ्रम में है। लड़की बस अपनी जरूरत की पूर्ती कर रही हैं, प्यार के नाम पर छल रही हैं। लड़कों की भी अपनी फिजिकल जरूरत होती हैं, वों लड़की सें मिलते, घुमाते, उन पर खर्च करते और अपनी फिजिकल जरूरतों कों पूरा करवाते। लड़कियों कों लगता है कि यें लड़का मुझे चाहता है, मेरे सपनों कों पूरा कर रहा हैं, इसलिए वों भी अपनी आबरूह लड़कों कों दे देती हैं।  उनके सामनें निवस्त्र हों जाती हैं। लड़की कों क्या पता है कि वों प्यार नहीं, लड़का सिर्फ अपनी जरूरतों की पूर्ति कर रहा है। 

इसकें अलावा अगर लड़का या लड़की किस भी एक नें जरूरत पूरी नहीं की तों एक नया शब्द "Breakup"  बोलकर छोड़ देते हैं।  

अब आप बताए क्या यह प्यार हैं ।

सच्चा प्यार करना इतना आसान है मगर लोगों के अदंर बेईमानी इतनी आ गई है तों कोई रिश्ता अब सच्चा नहीं लगता।  जिसकें साथ सात जन्म साथ रहनें का वादा किया उसनें जरूरत की पूर्ति नहीं की तों छोड़ दिया।  इसलिए प्यार करें तों निस्वार्थ अन्यथा ना करें। क्योकिं प्यार सें कितनी की जिदंगी खराब हों चूँकि है और कितने की आबाद हों गई।

 सच्चा प्यार करें और सच्चा जीवनसाथी चुनें। 

मुस्कान केशरी 

मुजफ्फरपुर बिहार 

एम एस केशरी पब्लिकेशन की संस्थापिका