अग्निपथ योजना पर रोक लगाने से दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

दिल्ली : दिल्ली होईकोर्ट ने गुरुवार को अग्निपथ योजना पर रोक लगाने से इनकार करते हुए इसके खिलाफ याचिकाओं पर केंद्र से विस्तृत जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने केंद्र को मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया और आगे की सुनवाई 18 अक्टूबर को होनी तय की।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने किसी भी अंतरिम आदेश को पारित करने से इनकार करते हुए कहा कि वह इस मामले पर अंत में सुनवाई करेगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि याचिकाएं सशस्त्र बलों में विभिन्न पदों पर भर्ती के मुद्दों से संबंधित है, जिस पर केंद्र को जवाब देना होगा। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को अवगत कराया कि मामले में एक मजबूत प्रतिक्रिया दायर की जाएगी। 

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अग्निपथ योजना को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को दिल्ली उच्च न्यायालय में ट्रांसफर कर दिया था, जहां इस योजना के खिलाफ इसी तरह की चुनौतियां पहले से ही लंबित हैं। पिछले हफ्ते, सेना के एक पूर्व कर्नल ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें सशस्त्र बलों में अल्पकालिक भर्ती की अग्निपथ योजना को रद्द करने की मांग की गई थी। इसमें साथ ही कहा कि उन उम्मीदवारों के चयन को रद्द नहीं किया जाए। 

जिन्होंने पहले ही 2019 में भारतीय वायुसेना के लिए भर्ती परीक्षा पास कर ली है। अग्निपथ योजना के बाद रद्द की गई सभी पिछली भर्ती प्रक्रियाओं को फिर से शुरू करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक और जनहित याचिका दायर की गई थी। अधिवक्ता विजय सिंह और पवन कुमार के माध्यम से दायर एक उम्मीदवार की याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने 30 जुलाई 2020 से 8 अगस्त 2020 तक सिरसा में सेना भर्ती रैली में सैनिक जनरल ड्यूटी के पद के लिए आवेदन किया था। एक अन्य जनहित याचिका भारतीय नौसेना की भर्ती प्रक्रिया और अधिकारी रैंक से नीचे के व्यक्ति (पीबीओआरएस) के मानदंड को शॉर्टलिस्ट करने के खिलाफ है।