गुरुवर (उल्लाला छंद )

गुरुवर  मेरे   ज्ञान  का, बहुत  बड़ा  भंडार  है |

उनकी होती जब कृपा, बढ़े  छंद  से  प्यार है ||

नवल  तत्व निर्माण में , देते  गुरुवर  ध्यान  हैं |

आप सँवारे शिष्य को, जग में  आप महान हैं ||


प्रथमम  वंदन आपको,चरण पखारूँ नाथ है |

चरण कमल में  आपके, झुका रहे ये माथ है ||

छंद  ताल अरु  बोध लय, देते अद्भुत ज्ञान हैं |

गुरुवर जब करते कृपा, बनता शिष्य महान है  ||


वंदन गुरुवर आपको, चरण कमल तव  ध्यान  है |

करूँ साधना गुरु प्रथम, जग  में  मिलता  मान है ||

गुरुवर  ज्ञान   प्रकाश   से , बनी  लेखनी  धार  है |

करती नित नव मैं सृजन, गुरुवर सुख का सार है ||


सत्य कहा था आपने, धैर्य धरो तुम कल्पना |

सीखो छंद विधान को, बने लेखनी अल्पना ||

शब्दों के मोती मिले, करना साधक साधना |

धन्य हुई गुरु पूर्णिमा, करुँ चरण आराधना ||


ज्ञान मिले गुरु से सदा, गुरुवर  परम  प्रकाश हैं |

सरगम संगम साधना, सुमधुर सुखमय आस हैं ||

गुरुवर  विद्या  दान से, मिटा  तिमिर अज्ञान का |

मार्ग  दिखाया  आपने,सत्य  जगत  में मान का ||

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कवयित्री

कल्पना भदौरिया "स्वप्निल "

लखनऊ

उत्तरप्रदेश