राज ए दिल

वो पूछते है

राज़ ए दिल,

मगर सब बताऊ कैसे!

छिल गया है दिल

बताऊ' कैसे,

एक पीर है हिया में,

जताऊ  कैसे!

वो आये कल,

सपने मे एक

भरम की तरह!

ये सबको बताऊ कैसे,

इस मासूम से चेहरे

और ! इन मुस्कुराती

आंखों का असल भाव

और सार,जताऊ कैसे!


पारुल राज,नई दिल्ली