"प्रेम प्रीत की रीत निराली..."

नव गीत जमाना हित का 

सब प्रीत निशाना मीत का । -२

अभी अभी तो जाना है 

सभी सभी ने माना है ।


प्रेम प्रीत की रीत निराली ।

प्रेम प्रीत की गीत निराली ।।


ख्याल ख्याल में पलकों में सोई 

बस चुका है दिल में दिल नसीं कोई । -२


अभी-अभी तो जाना है 

सभी सभी ने माना है ।

नव गीत जमाना हित का 

सब प्रीत निशाना मीत का ।


प्रेम प्रीत की रीत निराली ।

प्रेम प्रीत की गीत निराली ।।


अभी भी वह जा रही है 

बीच सखी के उस सड़क में ।

तभी भी यह मन सोचता था 

नीच तक धड़कन की धड़क में ।।

 

वह बीच सखी के उस सड़क में 

मैं नीच धड़कन की उस धड़क में ।

यह क्या है ...! अभी समझा है 

अभी अभी तो जाना है 

सभी सभी ने माना है ।


नव गीत जमाना हित का 

सब प्रीत निशाना मीत का ।


प्रेम प्रीत की रीत निराली 

प्रेम प्रीत की गीत निराली ।


ख़्याल ख़्याल में ही

किसी का आश धड़कन में समा गया ।

उम्र हुआ भी नहीं 

किसी के संग प्यार मोहब्बत में समा गया ।।


किसी का आश धड़कन में समा गया 

किसी के संग प्यार मोहब्बत में समा गया ।


अभी अभी तो समझा है

अभी अभी तो जाना है 

सभी सभी ने माना है 


नव गीत जमाना हित का 

सब प्रीत निशाना मीत का 


प्रेम प्रीत के रीत निराली 

प्रेम प्रीत की गीत निराली ।


स्वरचित एवं मौलिक 

मनोज शाह 'मानस'

मो.नं.7982510985