मुमताज़ बेगम

पैंसठ वर्षीय रवीना आज बच्चो की जिद के कारण, आगरा का ताजमहल घूमने निकली। बड़े उत्साह से सज धज कर अपनी बेटी और अपने श्रीमान जी के साथ कार में खाने पीने का सामान रखकर निकल पड़ी। ऑनलाइन टिकट ले लिया गया था, फिर भी लंबी लाइन थी, अब पहुँच गए, लाइन में तो मजबूर होकर खड़ी रही।

आगे बढ़ते रहे, फ़ोटो वीडियो की शौकीन रवीना ने समय का पूरा उपयोग किया।

बारी आने पर पर्स की जबरदस्त चेकिंग हुई। महिलाओ का  पर्स तो विभिन्न चीजों से भरा ही रहता है, वैसे भी उनका जो दूसरे शहर से घूमने आई हो। डायबिटीज वाली रवीना के पर्स में चार पांच अमूल चॉकलेट थी, चेकिंग आफिसर ने सब उठाकर रख लिया। रवीना के मन मे आया, ये लोग रोज सौ, पचास चॉकलेट जरूर ले जाते होंगे। फिर दवाई निकली पर्स से, उनपर उन्हें दया आ गयी। सारा मेकअप आइटम चेक किया गया। फिर सबसे नीचे से एक छोटी सी मार्बल के गणेश जी की प्रतिमा निकली। उसको उन्होंने निकाल कर रख लिया। झट से रवीना ने पूछा, "ये छोटे से बप्पा कई वर्षों से मेरे बैग में है, इससे क्या प्रॉब्लम हो सकती है।"

"अरे आप समझती नही हो, झगड़े की जड़ ऐसी मूर्तियां हो सकती हैं, ये ताजमहल के अंदर ले जाना मना है।"

रवीना मन मसोस कर रह गयी, और धीरे धीरे अपने परिवार के साथ आगे बढ़ती रही।"

जो उत्साह था, वो कुछ घट चुका था। फिर भी फ़ोटो वीडियो में मन लगाने लगी।

कुछ देर आगे बढ़ते ही लगा, अब चलना मुश्किल है, कमर में मोच आ गयी थी। रवीना के बेटी एमबीबीएस डॉक्टर थी, वो बोली, "बैठ जाइए, मम्मा, और सबलोग आराम करने लगे।"

फिर रवीना ने पार्क में बैठकर सबसे कहा, "मैं अब ज्यादा चलने की स्थिति में नही हूँ, सबलोग जाओ घूम कर आओ, मेरे पास मोबाइल है, कुछ आवश्यकता हुई तो बताऊंगी।"

फिर सब ताजमहल के अंदर गए।

रवीना बहुत थक गई थी, आंखे बंद होने लगी। अचानक महसूस हुआ कोई रानी उसके सिरहाने आकर बैठ गयी और बोली, "मैं मुमताज हूँ, परेशान नही होना, महिलाये वैसे भी ज्यादा परिश्रम नही कर पाती है, मन से ही सहनशील होती है।"

"अरे आप मुमताज बेगम, आप तो बहुत भाग्यशाली है, जो आपके प्रेमी राजा शाहजहां ने आपके लिए ताजमहल बनवाया।"

"ऐसा कुछ नही है, सब महिलाये बहुत कुछ झेलती हैं, मैंने भी सहा है, पता है, चौदहवी संतान के जन्म के समय मैंने कई किलोमीटर की पैदल यात्रा की और उसी के कारण मेरी मृत्यु हुई।"

"तुम जो ये सात अजूबे में एक ताज महल में बैठी हो न, जो दुनिया ने देखा, पर मैंने नही देखा।"

तभी रवीना के परिवार वाले वापस आ गए और बोले चलिए , धीरे धीरे उनके श्रीमान जी पकड़ कर उन्हें कार तक ले आये। मन ही मन रवीना बहुत खुश थी, मुमताज बेगम के दर्शन हो गए और एक ताजमहल फ़िल्म का गाना गुनगुनाने का मन कर रहा था.....जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा

स्वरचित

भगवती सक्सेना गौड़

बैंगलोर