लक्ष्य और सफलता

कुछ व्यक्ति जीवन में कड़ा परिश्रम करके सफल तो हो जाते हैं ।परंतु कुछ गलतियों के कारण  सफल होते हुए भी असफल हो जाते हैं।

मिलन बहुत होनहार बालक था, वह पढ़ाई में तो आगे रहता था। उससे क्रिकेट खेलने का भी शौक था। राष्ट्रीय स्तर पर उसने अच्छा खेल प्रदर्शन कर सफलता हासिल कर ली थी।

इस सफलता का राज उसके पिताजी के  वचन थे ।

जिन्हें मिलन हमेशा याद रखता था वह उसको हमेशा कहा करते थे "बेटा जीवन में जिंदगी जीने का एक निश्चित लक्ष्य बनाओ और उसे प्राप्त करने के लिए कड़ा परिश्रम करो तो तुम्हें सफलता सदा मिलेंगी"।

मिलन में तो जीवन में दो लक्ष्य बनाए ,पहला दसवीं क्लास में 90% से ज्यादा अंक लाना ।

और दूसरा क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना।

मिलन इन दोनों लक्ष्यों के लिए जी जान से मेहनत कर रहा था ।

10वीं की बोर्ड की परीक्षा समाप्त हो गई थी परिणाम घोषित होने वाला था।

सभी परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे थे ,परिणाम घोषित होते ही मिलन की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। उसने अपने लक्ष्य से भी ज्यादा 94 परसेंट मार्क्स प्राप्त कर लिए थे।

मिलन में जीवन में अपना एक लक्ष्य को पूरा कर लिया था अब उसे दूसरा लक्ष्य पूरा करने के लिए कठोर मेहनत की जरूरत थी‌

उसको क्रिकेट के लिए इतनी मेहनत करनी थी ,कि उसका चुनाव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में हो जाए ‌आखिरकार वह दिन भी आ गया जब उसे अंतरराष्ट्रीय टीम के लिए चुन लिया गया मिलन ने दोनों में ही अच्छा प्रदर्शन किया और उसे सम्मान प्राप्त हुआ।

लेकिन धीरे-धीरे उसने परिश्रम करना छोड़ दिया। जिसके फलस्वरूप उसको 11वीं में बहुत कम अंक प्राप्त हुए वह फेल होते होते बचा और उसका क्रिकेट का प्रदर्शन भी खराब था कई मैच  बुरी तरह हार गया। जब लगातार  7,8 मैच हारता रहा,तब उसका मन खेलने में भी नहीं लगता वह उदास रहने लगा।

मिलन के पिताजी ने मिलन को समझाया बेटे तुमने कड़ा परिश्रम करके अपने लक्ष्य को तो प्राप्त कर लिया था। परंतु लक्ष्य प्राप्त करने के बाद अधिक मेहनत की आवश्यकता होती है जो तुमने नहीं की।

उसी का परिणाम तुम्हारे सामने है।

मिलन के पिताजी मिलन को जंगल घुमाने के लिए लेकर गए मिलन में देखा कि एक हिरण शेर के चंगुल से छूटकर आ गया और वह अपनी इस सफलता पर नाचने लगा। और खुश होने लगा। कि देखो मैं तो मौत के मुंह से बच कर आ गया हूं शेर भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाया।

उसके इसी भ्रम के कारण शेर ने उसको पुनः दबोच लिया उसे अपनी गलती की सजा अपने प्राण देकर चुकानी पड़ी।

अब मिलन को समझ आ गया था ,सफल होना एक यात्रा है लक्ष्य नहीं जिस पर हमें निरंतर मेहनत करके चलना होगा

अगर हमने बीच में मेहनत करनी छोड़ दी तो हम अपने लक्ष्य से भटक जाएंगे और फिर हमें सफलता नहीं मिलेगी

उसने 12वीं में मेहनत करके 95% नंबर हासिल की है और क्रिकेट में भी खूब मेहनत करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया।

                        रचनाकार ✍️

                        मधु अरोरा