श्यामल मेघ अब बरस जा

हे ऋतुओं के राजा ऋतुराज,

बढ़ रहा वसुंधरा का ताप।

कहां छिपा श्यामल मेघ?

बरसाओ वारि हो गई बेर।१।


झुलस रहे खेत-खलिहान,

हलधर भी हैरान-परेशान।

मृत्तिका में छुप बैठा दादुर,

ना टर्र-टर्र करता है आकुल।२।


चंचल सघन कृष्णवर्ण मेघ,

क्यों बना तू मूक - वधिर?

उमड़ - घुमड़ बरस जाना,

देख खग-विहग हुए अधीर।३।


पुष्प मुरझाया मधुकर बौराया,

सरोवर का कठं गया सूख।

हंस अब ना करता क्रिड़ा,

वारिद बरस जा झूम-झूम।४।


बाट जोहता व्याकुल चातक,

प्यास बुझा जलधर आकर।

नीलकंठ झूमे कानन-कानन,

देख- देख कारे -कारे बादल।५।


गरज-गरज गरज जा मेघ,

बरस-बरस बरस जा मेघ।

आतुर मन प्यास बुझा जा,

श्यामल मेघ अब बरस जा।६।


प्रियंका त्रिपाठी 'पांडेय'

प्रयागराज उत्तर प्रदेश