होंसला न टूटे

यह वक्त है

वक्त बदलता रहता है

उतार चढ़ाव तो

जीवन का हिस्सा हैँ

वक्त का खेल तो

देवी देवताओं ने भी सहा है

पर इन्होंने वक्त से

कुछ भी न कहा है

बल्कि लड़े हैं अपने हालातों से

लड़े हैं अपने भाग्य से

रावण था कितना शक्तिशाली

लेकिन वक्त उसका गुलाम न बना

कृष्ण और राम भगवान हैँ

वक्त इनके इशारों पर न चला

यदि भगवान वक्त को

अपने इशारों पर चलाते

तो जो बनाई है दुनिया

इसको कैसे सिखाते

लड़ते रहना है वक्त से

लड़ते रहना है परेशानियों से

उसे कुछ भी तो सहना नहीं

क्योंकि चाल उसी की चली

इस दुनिया में यह जान लेना

कि हम तो बस यात्री हैं

यह सुख का सबसे बड़ा साधन है

पर वक्त यह देख कर हँसता है

कहता है सिकंदर की नहीं मानी मैंने

तो मैं किसकी मानूंगा

कर्म करना मनुष्य का धर्म है

भाग्य का ही दूसरा नाम कर्म है

प्रकृति भी वक्त को

अपने इशारों पर नहीं चलाती

बल्कि वक्त जो कहता है

उसको वह भी अपनाती

वक्त का अंदाज अलग है

वक्त को मनमानी करने दो

बस हौसला न टूटे

अपने कदमों को आगे बढ़ने दो

पूनम पाठक "बदायूँ "