सावन में शिव ध्यान

पावन शिव के पर्व में, रिमझिम गीत फुहार।

शिव-भजनों के भाव से, खुलता  अंतर्द्वार।


जनमन को दें  पूर्णता,  धर्म सत्य गठजोड़।

श्रावणता  गुणग्राहिता, तपसा भाव निचोड़।


सावन में माँ तप करें , शिव मिलते  पति-रूप ।

हरित ज्योति शिव-मय धरा, उत्सव-भाव अनूप।


सावन शिव को प्रिय सदा, जो चेतन आयाम।

आदि अंत जिनका नहीं, रखें धरा सुर-धाम।


आरण्यक जो देव हैं,  शिव  वेदों के सार।

भार्या हैं माँ पार्वती , कार्तिक विकट कुमार।


सागर मंथन काल में , विष लाता भूचाल।

शिव जग के रक्षक बने, कंठ हलाहल ढाल।


@ मीरा भारती,

  पटना,बिहार।