गजल : नजर में कभी ये नजारा न होता!

नजर में कभी ये नजारा न होता!

तुम्हारी नजर का इशारा न होता!!


भटकते ही रहते अंधेरों में हम तो

तेरे प्यार का जो सहारा न होता!!


थीं आमादा लहरें डुबाने को कश्ती 

पकड़ हाथ तुमने उबारा न होता!!


जो होतीं न मुझ पर नजरें इनायत 

मयस्सर मुझे भी किनारा न होता!!


जो पहले ही तुमसे मुलाकात होती 

तो गर्दिश में मेरा सितारा न होता!!


मेरी तिस्नगी मुझको जीने न देती

मुझे प्यार से यूं पुकारा न होता!!


रश्मि मिश्रा 'रश्मि'

भोपाल मध्यप्रदेश