पानी का महत्व

बारह साल का अयान पानी के दुरुपयोग को देखकर मन ही मन बहुत दुखी हो रहा था ,उसके स्कूल के बच्चे खाने की आधी छुट्टी में जो अपने घर से बोतलों में पानी लाते थे उसको फेंककर स्कूल के वाटर कूलर से भर रहे थे।

यह स्कूल के बच्चों का रोज का ही नियम था, बच्चों की बोतलों का पानी दोपहर तक ठंडा नहीं रहता था। इसलिए वह वाटर कूलर  से उस पानी को फेंक कर पानी भर लेते थे।

लेकिन अयान जिस मोहल्ले से आता था वहां पर पानी की हर दूसरे दिन समस्या खड़ी रहती थी। सब लोग पैसे मिलाकर पानी का टैंक मंगवाते थे, और उसके बाद भी पानी के लिए एक एक बाल्टी के लिए लंबी लाइन लगी रहती थी।

सबसे दुख की बात यह थी ,कि टैंकर का पानी भी बहुत गंदा होता था ।पर मजबूरी वश लोगों को उस पानी से काम चलाना पड़ता था। वह उस पानी को कभी फिटकरी डालकर कभी उबालकर छानकर प्रयोग में लाते थे।

अयान जब भी अपने दोस्तों को समझाने का प्रयास करता वह लोग उसको कंजूस कंजूस कहकर चिढ़ाते थे, उसका मजाक बनाते थे।

एक दिन अयान ने कक्षा में जाकर अपने अध्यापक से बोला सभी छात्र बोतलों का पानी फर्श पर बगैर देते हैं इससे पानी की कितनी बर्बादी होती है।

कक्षा अध्यापक ने उसकी बातों को समझा और कहा ठीक है मैं कक्षा के बच्चों को समझाऊँगा!

एक दिन अध्यापक ने बच्चों को पानी के महत्व के बारे में समझाया।

उन्होंने बच्चों को कहा" बच्चों अगर तुम इस तरह से पानी की बर्बादी करोगे तो कुछ समय बाद धरा पर पानी नहीं रहेगा और पानी की बहुत किल्लत आ जाएगी फिर तुम क्या करोगे।"

जिससे कुछ बच्चों ने तो पानी को बर्बाद करना बंद कर दिया लेकिन कुछ शरारती बच्चों ने अपने अध्यापक की बात की जरा भी परवाह नहीं की।

अयान की बातों से प्रभावित होकर उन्होंने गौर करना शुरू किया पानी की इतनी बर्बादी देखकर उनको बहुत अफसोस हुआ।

अध्यापक ने अयान के साथ मिलकर बच्चों को सुधारने का प्रयास करना चाहा।

अयान ने अध्यापक जी को एक सुझाव दिया  जिसको सुनकर सुनकर कक्षा अध्यापक की आंखें भी चमक उठी  और उन्होंने अयान को गले से लगा लिया।

दूसरे ही दिन उन्होंने प्रिंसिपल जी से कहकर वाटर कूलर के पास एक बहुत सुंदर सा भूरे रंग का जार रखवा दिया। और उन्होंने बच्चों से कहा क्या तुम्हें लगता नहीं,कि बर्तन थोड़ा सा अलग है।

बच्चों ने ध्यान से देखा तो उन्होंने देखा उस भूरे रंग के बर्तन पर तरह-तरह की सुंदर आकृतियांँ बनी हुई थी कोई उसको देखकर बोला अरे इस पर तो शेर बना हुआ है दूसरा बोला अरे इस पर तो तोते भी बने हुए हैं तीसरे ने कहा अरे यह परी कितनी सुंदर है एक बच्चा तो बोला अरे यह मोर तो देखोअनेक प्रकार की कलाकृतियों से बना बर्तन बहुत ही सुंदर लग रहा था।

तभी एक बच्चा बोला देखो इसमें से तो एक नदी भी बह रही है वह कितनी सुंदर लग रही है।

बस फिर क्या था सब बच्चे उस पर  कलाकृतियां ढूंढने लगे।

थोड़ी देर बाद प्रिंसिपल साहब सामने आकर कहा कि बच्चों देखो यह जादुई बर्तन है, इसमें तुम कितना ही पानी डालो यह कभी भरेगा नहीं।

सभी बच्चे आश्चर्यचकित होकर अपने प्रिंसिपल महोदय को देखने लगे। जहां थोड़ी देर पहले कलाकृतियों को देखकर शोर मच रहा था वहां अब एकदम से शांति हो गई, बच्चे आगे अपने अध्यापक के बोलने का इंतजार कर रहे थे।

अध्यापक जी ने मुस्कुराकर बच्चों की ओर देखा और वह बोले जिससे मैंने यह बर्तन खरीदा है। उसने मुझे यह बर्तन जादुई कह कर बेचा है और मैं इस बर्तन को लेकर बहुत खुश हूं।

धीरे-धीरे आपस में बातें करने लगे

प्रिंसिपल महोदय ने कहा बच्चों शांत हो जाओ, अब कल से पूरा विद्यालय यह जादुई खेल खेलेगा जो पानी तुम जमीन पर डालते हो वह तुम इस बर्तन में डालना और देखते रहना यह कभी भरेगा ही नहीं।

सारे बच्चों के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गई सब एक दूसरे का चेहरा देखने लगे फिर क्या था सब  खाने की छुट्टी का इंतजार करने लगे।

सारे बच्चे  जल्दी-जल्दी अपना खाना समाप्त कर भागते भागते वाटर कूलर के पास पहुंँच गए ,उनकी आंखों के सामने तो वह जादुई बर्तन ही नाच रहा था ।अब सब ने अपनी अपनी बोतलों का पानी उस बर्तन में पलट दिया कुछ तो वाटर कूलर में से भी पानी निकालकर बर्तन में डालने लगे।

जहांँ आंगन में छुट्टी के बाद चलने में भी परेशानी होती थी वहां पानी की नदी बन जाती थी छप छप की आवाजे आती थी वहां आज बिल्कुल फर्श आज बिल्कुल साफ दिख रहा था ।वहांँ पानी की एक भी बूंद नहीं थी।

अभी बच्चे उस  पात्र में अपनी बोतलों का पानी डाल रहे थे जो कितना पानी डालने के बाद भी वह बर्तन खाली ही दिखता था।

ऐसा करते-करते कहीं महीनो व्यतीत हो गए वार्षिक परीक्षाएं भी समाप्त होने वाली थी ,पर फिर भी बच्चे उस जादुई बर्तन में पानी डालना नहीं भूलते थे ।और हर कोई अपने दांतो तले उंगली दबाते थे कि यह बर्तन क्यों नहीं भरता हम इसमें इतना पानी रोज डालते हैं।

परीक्षाएं समाप्त होने के बाद बच्चे रिजल्ट का इंतजार करने लगे।

जिस दिन उनको परिणाम मिलना था सभी बच्चे अपने माता-पिता के साथ विद्यालय गए।

प्रिंसिपल महोदय ने उनको विद्यालय के पीछे पड़े खाली आंगन में आने के लिए बोला।अयान की क्लास के बच्चे भी उस मैदान में जाने की लिए बहुत गुस्सा हो रहे थे ।वह बिल्कुल बंजर था।

पर सिर्फ अयान और कक्षा अध्यापक एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे।

जैसे ही विद्यालय के चौकीदार ने मैदान में जाने के लिए विद्यालय के पीछे का दरवाजा खोला तो सब बच्चे आश्चर्यचकित रह गए उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ सभी बच्चों को ऐसा लगने लगा जैसे वह किसी दूसरी दुनिया में आ गए।

वहाँ तरह-तरह के सुंदर रंग बिरंगे फूल खिले हुए थे और इधर से उधर सुंदर सुंदर तितलियां फूलों पर मंडरा रही थी सुगंधित हवा फूलों को छूकर सबके मन को मोहित कर रही थी बच्चे और उनके माता-पिता उस प्राकृतिक सुंदरता को देखकर बहुत खुश हो गए तभी प्रिंसिपल महोदय ने आकर कहा यह जो इतनी सुंदर तितलियां हरे भरे पेड़   चह चाहती चिड़िया और अनेक प्रकार के फूल देख रहे हो

इस सब की सुंदरता का राज आज मैं तुम्हें बताता हूं।

बच्चों तुम्हें याद है जो जादुई बर्तन वाटर कूलर के पास रखा था तुम समझाने पर भी पानी की बहुत बर्बादी करते थे। मानते नहीं थे तो यह सब सुझाव हमें अयान ने दिया था जिसका परिणाम तुम्हारे सामने हैं।

यह सुनते ही सब बच्चों ने अयान की ओर देखा जो दूर खड़ा मुस्कुरा रहा था

सबकी आंखों में हैरत और प्रशंसा के मिले-जुले भाव थे। प्रधानाध्यापक मुस्कुराते हुए बोले वह कोई जादुई बर्तन नहीं था ,बल्कि हमने  अयान के कहने पर उसमें एक छोटा सा छेद कर दिया था और एक नदी लगा दी थी जिसका पानी सीधे मैदान मे आकर गिरता था।

रविवार के दिन अयान माली काका के साथ बागवानी में उनकी सहायता करता था। आज देखो इस जैसा सुंदर बगीचा पूरे शहर में कहीं नहीं है।

सभी छात्रों की आंँखों से खुशी के आंँसू बह निकले उनके माता-पिता थोड़े शर्मिंदा हो रहे थे कि उन्होंने बच्चों को कभी पानी के महत्व के बारे में क्यों नहीं बताया आज उन खिलखिलाते फूलों ने सबकी सोच को एक नई दिशा दे दी सभी बच्चे और अभिभावक अयान को बधाई दे रहे थे और जब अयान ने उन सब को यह बताया कि कैसे वह पानी की किल्लत को झेल रहा है एक एक बूंद पानी की कितनी कीमती है तुम लोग यहां पानी व्यर्थ करते हो और वहांँ किसी को पानी पीने को नहीं मिलता सभी बच्चों ने मन ही मन प्रतिज्ञा करें कि आज से वह पानी को व्यर्थ नहीं होने देंगे, आज  पानी का महत्व समझ आ गया था।

उन्हें समझ आ गया था कि हर चीज का जीवन में एक महत्व होता है ।पानी तो हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस तरह अयान की सूझबूझ से पानी  व्यर्थ होने से बच गया और जो कभी बंजर पड़ी हुई धरती थी वहां पर खुशहाली का साम्राज्य हो गया।।

                      रचनाकार ✍️

                      मधु अरोरा