वचन

सात वचन लिये हैं साथ में हमने,

वचन की लाज सदा निभाऊंगी,

कभी तुम झुक जाना प्रिय,

कभी मैं झुक जाऊँगी।


तुम पर समर्पित है मेरा जीवन,

तुम हो मेरे जीवन का अवलम्बन,

हर पल साथ रहते हो तुम,

तुम ही सर्वस्व,तुम ही मेरा धन।


देती हूँ ये वचन आज,

शब्दों के कटु वाण न चलाऊंगी,

छू न सके वेदना के तीर तुम्हें,

ईश्वर से यही मनाऊँगी।


यौवन ज्यों बीत रहा खुशी खुशी,

यूँ ही बीते जीवन सारा,

पार करेंगे झंझावतों को,

बनके इक दूजे का सहारा।


साथी मेरे वचन का मान 

सदा तुम भी रखना,

"मैं"को भूल जाना,

"हम"बनकर ही रहना।


           रीमा सिन्हा (लखनऊ)