शोपीस बन कर रह गया ओरन का डाकघर

-डाक विभाग के अधिकारी बेखबर, शिकायतों का नहीं लेते संज्ञान

बांदा। नगर व कस्बा ओरन में चार वर्ष से ज्यादा समय से उपडाक घर खुले हों गया लेकिन आज तक डाकघर में मिलने वाली सुविधाएं बहाल नहीं हो सकी है। डाकघर में स्पीड पोस्ट व रजिस्ट्री, पोस्टल आर्डर व समय से रुपये की निकासी के लिए नगर के लोगों को 20 किलोमीटर दूर लंबा सफर तय करना पड़ता है। यह शिकायत समाजसेवी अरूणकांत द्विबेदी, चुन्नु, मनोज कुमार, श्यामनारायण आदि ने पुनः डाक अधीक्षक व जिलाधिकारी को पत्र भेजकर की है। 

जिले का आखिरी छोर में अति पिछड़े, बुनियादी सुविधाओं से वंचित कस्बा ओरन से लगभग चार दर्जन से ज्यादा गांव संबंद्ध हैं। इन गांवों के लोगों को डाक विभाग के किसी भी काम के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता है। तब इन गांवों के लोग वह सुविधा हासिल कर पाते हैं जो उन्हें यहां मिलनी चाहिए। यह हालत चार वर्ष से ज्यादा समय से खुले उपडाकघर की है। लाखों रुपए का सामान भी डाक विभाग रखा हुआ है लेकिन वह सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है। ओरन उप डाकघर में तैनात डाक प्रभारी पर मनमौजी काम करने का आरोप लगाया है। कहा जाता है कि जब मन हुआ तो कार्यालय खुल गया जब मन हुआ बंद। डाकघर अव्यवस्थाओ लेकर स्थानीय लोगों ने पूर्व में इसकी शिकायत शीर्ष अधिकारियों से भी की थी लेकिन सुधार का आश्वासन दिया गया था लेकिन कोई सुधार अभी तक नहीं हुआ है।