प्रधानाचार्य ने जल संचयन एवं संरक्षण की बताई महत्ता

बांदा। ब्रह्म विज्ञान इंटर कालेज अतर्रा में जल संचयन एवं संरक्षण पर बच्चों को समझाते हुए, प्रधानाचार्य शिवदत्त त्रिपाठी ने कहा कि जल है तो जीवन है, जल की एक एक बूंद हमारे लिए उपयोगी है, इसलिए इसका दुरूपयोग न करें, अनावश्यक पानी को न बहने दे, साथ ही वर्षाकाल में पानी को बचाने के लिए मेडबंदी, या छोटे छोटे तालाब या टैंक बनाकर जल का संग्रहण कर सकते हैं। प्राचीन काल में ऋषि मनीषी जंगल में रहकर नदी झरने के पानी का प्रयोग करते थे। इसके बाद कुये, फिर हैण्डपम्प के माध्यम से पानी मिला परंतु पुराने जलस्रोत सब सूख गये। 

गांवों में कुये सूख गये, और एक दिन ऐसा आयेगा कि पानी की कमी से लोगों का जीवन संकट ग्रस्त हो सकता है, इसलिए सभी से निवेदन है कि जल की बचत करें तथा इसके लिए पेड़ पौधों का रोपण अवश्य करें। कालीचरण बाजपेयी, अरुण कुमार, चेतराम, सुशील कुमार, सुरेन्द्र शर्मा, बीरेंद्र दीक्षित, कमलेश कुमार, सोमनाथ, शान्तिभूषण यादव, गिरिजेश मिश्र, राजेश कुमार, राजेन्द्र कुमार, जेपी कोमल आदि उपस्थित रहे।