कुविचार की सही सार्थकता

राजनीति अपार संभावनाओं से भरा हुआ व्यापार बन चुका है! यदि आप भी इसमें सफल व्यापारी बनकर अपनी सफल दुकानदारी चलाना चाहते हैं..! यदि आप इसमें खुद को चमकाना चाहते हैं..! लोगों की नजरों में आना चाहते हैं ! बिना अच्छे बुरे की परवाह किए जिंदगी में भरपूर तामझाम से जीना चाहते हैं! तो मुद्दे उछालते रहने की कला आपको आनी चाहिए.. 100% सफलता की गारंटी है ।

और देश तो इस समय मुद्दों से ही भरा हुआ है हिजाब का मुद्दा, नकाब का मुद्दा, मंदिर मुद्दा, मस्जिद मुद्दा, सड़क मुद्दा, रेलवे मुद्दा ,सेना मुद्दा ,शासन मुद्दा, मुद्दों की कमी नहीं है संसद से लेकर सड़क तक जहां भी मन करे बस मुद्दे उठाने की कला आनी चाहिए।

 संसद से लेकर घर की संसद तक कहीं पर भी मुद्दा उठाइऐ .. पर इतना याद रखिए संसद में मुद्दा उछालगे   तो लोग आपको पहचानेंगे.. अगर घर की संसद में मुद्दा उछालेंगे तो हो सकता है, आप पहचानने लायक ना रहें और आपकी सुशील पत्नी चंडिका का रूप धारण करके आपको कहीं पहचानने लायक ना छोड़े, इसलिए घर के बाहर ही मुद्दे उछालने की कला ज्यादा मुफीद है। लेकिन आजकल संसद भी कोई मुफीद जगह नहीं है वहां भी पहले जुबानी गोलियां चलती थी पर इधर कुछ सालों से सभ्यता का  कुछ ज्यादा ही विकास हो चुका है   हाथ, लात ,कुर्सी भी चलती है।

, पर घर से बाहर ज्यादा सुरक्षित है लेकिन मुद्दे पहचानने की कला भी आनी चाहिए ,ऐसा ना हो कि आप के मुद्दे फुसफुसिया बम साबित हो जो फुसफुसाकर शांत हो जाए, मुद्दा ऐसा चुनिए की प्रिंट मीडिया से लेकर सोशल तक आपके  कुविचारों की खूब निंदा की जाए, निंदा से बिल्कुल मत डरिए.. बस इस कहावत को याद रखिए

" बदनाम होंगे तो क्या नाम ना होगा "की तर्ज पर आप अपने आप को संतुष्ट कर सकते हैं।

आपके बोल बच्चन ऐसे होने चाहिए कि आपके  पड़ताल के लिए आप के विरोधी आपके पीछे-पीछे हड्डी सुघंते हुए कुत्ते के जैसे  लग जाए.. आपके विरोधी भी सोचे अरे यह मुद्दा कैसे छूट गया और अपने सलाहकारों को भरपेट लानत मलामत करें .. तभी मुद्दे की सार्थकता है एक बार आप के विवादित कुविचार फेमस हो गए फिर तो आपको जनता अच्छे से पहचान लेगी और बड़ी-बड़ी पार्टियों और बड़े-बड़े रैलियों और खेमों में बुलाया जाएगा और आप की राजनीति की खटारा जुगाड़ गाड़ी लग्जरी गाड़ी में बदलकर फराटे से दौड़ेगी.. और आपकी राजनीतिक की दुकान चल निकलेगी।

रेखा शाह आरबी 

बलिया (यूपी)