नियम विरूद्ध खनन पट्टे की जांच की मांग

सहारनपुर। नियम विरूद्ध कराये जा रहे खनन पट्टे की जांच की मांग को लेकर ग्रामीण सलमान ने गाम फैजाबाद में इरशाद अली द्वारा  किये गये खनन पट्टे की शिकायत जिलाधिकारी से की है। जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने मामले का संज्ञान लेते हुए एक जांच टीम गठित की थी। जांच टीम ने जब जांच रिपोर्ट डीएम को प्रेषित की तो बाद में खनन कार्य बंद करा दिया गया था। तहसील की रिपोर्ट में सभी खसरा न. बैराज़ से 1 किमी. दूर बताये गये थे लेकिन खनन परमिट में दिया गया खसरा न. 43 (ख ) 700 मीटर से भी कम दूरी पर था जिसको परमिट कराने वाले व्यक्ति ने शपथपत्र देकर कहा था कि वह 43ख में खनन नहीं करेगा, परन्तु परमिट कराने वाले व्यक्ति ने जिला प्रशासन की आंख में धूल झोंककर बिना खसरा 43 ख में खनन किये सारे रव्वाने अलग अलग क्रेशर को बेच दिये। 

यानि बिना खसरा न. 43 ख की खुदाई करें जो की पानी में है इसके एमएम-11 रव्वने अवैध रूप से बेच दिये ओर प्रशासन की आँखों में धूल झोक दी। मौके पर देखा जा सकता है कि  खसरा 43(ख) में खनन नहीं हुआ है ओर पट्टे की खनन की साइड से देखा जा सकता है की खसरा 43 (ख) के सारे रव्वने बेच दिये मतलब कागजो में माल बेच दिया गया है, यानि जिस क्रेशर ने ये कागज खरीदे वो अब अवैध खनन कही से करकर बाजार में बेच देगा। यानि बिना मौके पर खुदाई किये सारा माल बिक गया।

 ये मामला अपने आप में एक अनोखा मामला है, इस  खनन पट्टे में पहले दिन से सारे काम नियमों के  खिलाफ हुए परन्तु किस आदमी की ताकत है इसके पीछे की तमाम अधिकारियो के आदेशों के बावजूद पुरा खनन कार्य समाप्त हो गया और जाँच के नाम पर धीरे धीरे पुरे पट्टे को ठिकाने लगा दिया गया। पट्टा तो सारा मिलीभगत कर ठिकाने लगा दिया गया अब जिलाधिकारी उच्च जाँच कराये कि शुरू से आखिर तक कौन कौन प्रभावशाली लोग इसमें शामिल थे जो शिकायत कर्ता के इतने सबूत देने के बाद भी योगी जी की सरकार के अधिकारी भी इस पट्टे का कुछ नहीं बिगाड़ पाये ओर मूकदर्शक बने रहें।