वक्फ बोड की बेशकीमती संपत्तियों पर हो रहे अवैध व्यवसायिक निर्माण

देश को चार चीफ जस्टिस देने वाले परिवार को खुद उप्र सरकार से न्याय की दरकार

प्रधानमंत्री व गृह मंत्री के आदेश के बाद भी खामोश है उप्र सरकार का बुलडोजर

लखनऊ। दशकों पुराने घटिया वक्फ बोर्ड के बने कानूनों की आड़ लेकर और वक्फ बोर्ड में व्याप्त घोर भ्रष्टाचार के चलते राजधानी में वक्फ बोर्ड की कीमती संपत्तियों को हड़पने का खेल नामचीन लोगों द्वारा खेला जा रहा है। जिसमें संबंधित थाना पुलिस के साथ एलडीए के अधिकारी भी शामिल है। मामला पुराने लखनऊ के नक्खास अकबरी गेट स्थित भवन संख्या 93/84 विक्टोरिया स्ट्रीट का है। यह संपत्ति सुन्नी सेन्ट्रल बोर्ड की वक्फ मुख्तार बेगम अलाल औलाद वक्फ संख्या 488/433 है।

 इस वक्फ संपत्ति का मालिकाना हक छियत्तर वर्षीय एडवोकेट एम0ए0 बेग के पास है। मुख्य बाजाार में स्थित इस बेशकीमती संपत्ति को शहर के नामचीन लोगों ने पहले तो नियम विरूद्ध तरीके से धोखे से अपने नाम पर एलाट करवा लिया फिर उस पुरानी बिल्डिग के मैटीरियल को पचास लाख में बेच दिया। साथ ही अब अवैध तरीके के उस स्थान पर व्यवसाजिक निर्माण करवा रहे है। 

जिसमें मिर्जा महमूद हुसैन, पूर्व सांसद, भूमाफिया बिल्डर दाउद अहमद, फैजी चौधरी, नासिर व नक्खास स्थित गोल्डेन टी के मालिक सहित कई अन्य लोग शामिल है। पीड़ित एम0 ए0 बेग के अनुसार उनके परिवार में चार-चार चीफ जस्टिस हुये है। जिनमें पूर्व चीफ जस्टिस आफ इण्डिया मिर्जा हबीबुल्लाह बेग, उ0प्र0 के चीफ जस्टिस नसीरूल्ला बेग, हैदराबाद के शकील अहमद जो बाद में उड़ीसा के राज्यपाल भी रहे है। इतना होने के बाद भी इस पर कब्जा करके अवैध व्यवसायिक निर्माण करवाया जा रहा है। 

यह घटना वर्तमान योगी सरकार के लिये एक चुनौती ही है कि पीिढ़ियों से लोगों को न्याय देने वाला परिवार ही आज न्याय की दरकार कर रहा ह। इस मामले को बेग ने जिलाधिकारी, एलडीए, पुलिस कमिश्नर आदि सहित सभी संबंधित अधिकारियों के सामने रखा परन्तु कही कोई सुनवाई न होने पर सीधे प्रधानमंत्री व गृह मंत्री को भेजा। जिसका संज्ञान लेकर आदेश भी दिया और इस पर अल्पसंख्यक आयोग के संयुक्त सचिव एस0ए0 पाण्डेय ने भी इस पर हो रहे निर्माण को अवैध बताया।

 साथ ही एफआईआर कराने का आदेश दिया। परन्तु इतना समय बीत जाने के बाद भी इस अवैध निमार्ण पर प्रशासन का बुलडोजर नहीं चला है। चौक थाना की पुलिस भी पूरी तरह से भूमाफियाओं के पक्ष में ही है। सभी तरफ से हार कर बेग ने माननीय उच्च न्यायालय में इसके विरूद्ध याचिका दायर कर दी है। वक्फ संपत्ति के बारे में बताते हुये एम0ए0 बेग ने बताया कि वक्फ संपत्ति दो प्रकार की होती है। 

जिसमे ऐक वक्फ संपत्ति से होने वाली आय का उपयोग केवल धर्माथ कार्यों के लिये हो सकता है। दूसरे प्रकार की संपत्ति को कोई बेच तो नहीं सकता है परंतु उसका मालिकाना हक पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है। यह वक्फ की संपत्ति सन् 1936 से उनके परिवार के पास है। जिस पर वर्तमान में हक उनका है।