मेरी पहली यात्रा

शाम को 5 बजे गंतव्य पर जाना था। 300 किलोमीटर दूर पहली यात्रा थी, इंदौर से सरवानिया महाराज के बीच 12 जुलाई 1984 अनजानी जगह, मेरे बड़े अंकलजी ने नीमच के टेलीफोन विभाग के आपरेटर एस के दुबेजी से इंतजाम करवाया था। बस में बार-बार गंतव्य का पूछने पर कंडक्टर ने भरोसा दिलाया। जब ठिकाना आऐगा तो उतार दूंगा, परेशान ना होवें। 

यात्रा के बीच में पानी बहुत गिरा, आधीरात 3 बजे नीमच बस स्टैंड पर उतरा, ठंड बहुत थी 6 बजे तांगे में बैठ कर दुबेजी के यहां पहुंचा, जो टेलीफोन विभाग में थे फिर 2 घंटे में तैयार होकर उनकी बाईक पर 20 किलोमीटर दूर MPEB के सरवानिया महाराज गांव  में नौकरी जाईन करके वापस नीमच उनके घर आये। इस तरह नौकरी जाईन कर शुक्रवार को वापस घर इंदौर आ गया। दूसरे दिन शनिवार व तीसरे दिन रविवार की छुट्टी थीं। फिर सोमवार से लगाकर पन्द्रह दिनों तक दूबेजी के घर से सरवानिया महाराज बिजली ऑफीस तक आता-जाता रहा फिर मैंने उसी गांव में कमरा लेकर रहना शुरू कर दिया।


                      - मदन वर्मा " माणिक "

                        इंदौर, मध्यप्रदेश