ये दुनिया..

हम तो  सदा से अच्छे ही थे..

बुरा तो हमे दुनिया ने बना दिया..!!

हम तो हमेशां हंसते रहते थे..

दुनिया ने ही तो हमें रुला दिया..!!

सबके लिए अच्छा अच्छा करते रहे..

दुनिया ने फिर भी क्या सिला दिया..!!

हम तो सबको दिल में जगह देते थे..

दुनिया ने ही खुद को नज़रों से गिरा दिया..!!

हमारे पास भी एक छोटा सा दिल है..

दुनिया ने आखिर क्यों  ये भुला दिया..!!

हम तो ज़िन्दगी के जबाब ढूंढ रहे थे..

दुनिया ने ही क्यों हमें सवाल बना दिया..!!

बहुत आरज़ू थी अभी जीने की..

दुनिया ने ही हमें जहां से रुख्सत करा दिया..!!

मौलिक एवं स्वरचित

रीटा मक्कड़