बीजेपी का 2024 का रोडमैप तैयार, सोनिया मुलायम भी निशाने पर

उत्तर प्रदेश की 75 सीटें टारगेट, दावा तो अस्सी का 

पन्ना प्रमुख मजबूत तो बूथ मजबूत, जहाँ 22 में चूके वहां ज्यादा फोकस

लखनऊ। जो काम सुई करे,वो न कर सके तलवार,यह बात बीजेपी से बेहतर भला और कौन जाने? बीजेपी की वही सुई हैं जो तलवार से ज्यादा चुनावी जीत में कारगर है। एसी की बीमारी करीब करीब हर नेता को लगी है, मगर एसी लगा आवास तब मयस्सर होगा जब नान एसी अथवा गांव की झोपड़ियों में रह रहे लोगों तक समय-समय तक पहुँचने की आदत बनी रहेगी। रणनीति भले बन्द कमरे में बने लेकिन इम्प्लीमेंट के लिए गांव गांव गली मोहल्ले में पैठ रखने वाले वर्कर हो। 

पन्ना प्रमुख बीजेपी के इसी कांसेप्ट की ईजाद हैं। मंच पर पहुंचे या न पहुँचे ,वोटर के घर जरूर पहुँचते है और इलेक्शन में इनकी पहुँच बूथ पर ईवीएम सामने आते ही वोट बन जाती है। 2022 फतह करने के बाद मिशन फतह 2024 में लग गई है बीजेपी। चुनाव में अभी बहुत समय है,ऐसा अन्य दल सोच कर सुसुप्ता अवस्था में ही दिखते हैं। बीजेपी अपनी कच्छप गति से सतत चलती रहती है और जीतती है। 

आपस में तीरंदाजी के लिए बीजेपी में जगह नही है। उत्तर प्रदेश में चुनाव दर चुनाव जीत हासिल कर रही बीजेपी का अब 2024 को लेकर अभी से रोडमैप तैयार है। बीजेपी का लोकसभा चुनाव में 75 प्लस सीट का टारगेट है। कहने को तो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष एवं जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह तो अस्सी की अस्सी पर फतह का दावा करते हैं। 

अखिलेश यादव से आजमगढ़ और आजम खां से रामपुर छीनने के बाद अब सोनिया गांधी से रायबरेली और मुलायम सिंह यादव से मैनपुरी पर भी फोकस कर दिया है। मिशन 24 के लिये वर्किंग 24 शुरू है।बैठकों का दौर जारी है। नेताओं और बूथ अध्यक्षों को टारगेट मिल रहे है। बीजेपी का यूपी में 50 फीसदी वोट पाने का लक्ष्य। टारगेट पूरा करने में बीजेपी की रीढ़ पन्ना प्रमुख अहम किरदार हो सकते हैं, पहले हुए हैं। 

कल पार्टी के सूबाई कार्यालय में हुई बैठक इसी सिलसिले में मानी जा सकती है। सीएम योगी खुद के मौजूद थे। विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार जीत मिली और लोकसभा की दो सीटों पर हुए उपचुनाव में भी बल्ले बल्ले। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को ज्यादा से ज्यादा जोड़ने की कवायद चल रही है। विधानसभा चुनाव में पन्ना प्रमुखों का काफी योगदान रहा। 

बीजेपी ने हर बूथ पर पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति की थी। उनकी जिम्मेदारी उनकी लिस्ट में आने वाले लोगों को बीजेपी से जोड़कर  मतदान बूथ तक पहुंचाना था,जो उन्होंने बखूबी निभाया। बीजेपी अब इस रणनीति को और धार देगी। पन्ना प्रमुखों को उन बूथों और सशक्त बनाया जाएगा जहां बीजेपी को पिछले चुनावों में हार मिली थी। बूथों को बीजेपी ने ए ,बी और सी कैटगरी में बांट रखा है और उसी के मुताबिक रणनीति होगी। 

विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार सफलता मिली थी लेकिन 22 हजार बूथ ऐसे हैं जहां बीजेपी कमजोर रही है। उन बूथों के लिए अलग से रणनीति बनेगी। संगठन मंत्री सुनील बंसल ने बताया था कि यूपी के 1 लाख 73 हजार बूथों को ए बी और सी कैटेगरी में बांटा गया है। इनमें 22 हजार बूथ ऐसे हैं जहां बीजेपी कमजोर रही है।सासंदों, संयोजकों, पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों को बूथों पर प्रवास की जिम्मेदारी है।