दिल में कोना है

मैंबहुत ख़ुश रहती हूँ, 

क्यूंकि खुशियों की कमी नहीं है,

 पर मेरे दिल में कोना है, 

जो रो लेना चाहता है।                

हमेशा आंसू दुख के नहीं होते, 

बादलों के पास सारा जहाँ है,

 सूरज है चाँद है सितारे हैँ, 

फिर भी वह रो लेना चाहता है।                      

मुस्कुराकर ज्यादा हंसकर, 

दिल भारी सा  हो जाता है, 

दोनों का संतुलन बनाना है, 

मन को हल्का करना होता है

कभी प्यारी माँ की यादें, 

या कभी किसी का रुखापन, 

प्रश्न पूछे जाने पर हों प्रश्न,

 दिल रो लेना चाहता है।                                          

ईश्वर इतने आंसू दे दे, 

कि यह दिल धुल जाये, 

रोना भूल भालकर, 

दिल हँसने लग जाये।

 बचपन की यादें भी 

संतुलित कर देती हैँ मन को, 

पर मेरे दिल में कोना है, 

जो रो लेना चाहता है।

मैं बहुत ख़ुश रहती हूँ, 

क्यूंकि खुशियों की कमी नहीं है।

  पूनम पाठक बदायूँ