पिता

नयनों में पलते है जिनके,  

सपने  न्यारे  न्यारे,

गगन  विशाल हमारे है वो, 

उड़ते  पंख पसारे।

कदम कदम पर पुष्प बिछाते,

लेते सभी बलाएं,

राह बनाकर लक्ष्य दिखाते, 

गुनते  नई कलाएं।

हृदय प्रीत की धारा बहती,

हिम्मत कभी न हारे,

ओणम ईद दिवाली होली,

सब उनसे ही जाना,

इस जीवन की धूप-छांव को,

उनसे ही पहचाना।

धरती  पर   वो  ईश  हमारे , 

सूरज   चंदा  तारे,

इच्छाएं   सौभाग्य  मानते, 

करते  नेहिल  वादे,

आशाओं का केंद्रबिंदु बन,

चुन चुन रखते यादें।

बसंतिक उपवन के माली, 

नदियाँ  के  है धारे,

राह दिखाते सदा सत्य की,

धर्म का मूल बताते,

मानवता की सेवा करना, 

कर्म द्वार दिखलाते।

अपनों को कभी नहिं भूलना,

मिलजुल रहना सारे, 

सीमा मिश्रा,बिन्दकी,फतेहपुर