तीखा तीर

घोर   घमंड   के   कारण  ही

ताज से  ही  हाथ  हो धो  बैठे

अबला - श्राप  और  चालीसा 

अकारण   आपा  से  थे   ऐंठे 

प्रभु राम की  महिमा  है न्यारी 

सदा  हैं रखवाली के लिये बैठे 

      वीरेन्द्र तोमर