बुंदेलखंड डेवलपमेंट रिसर्च फाउंडेशन ने विज्ञान साक्षरता व संचार के माध्यम से युवाओं को किया जागरूक

चित्रकूट। बुन्देलखण्ड डिवलपमेन्ट रिसर्च फाउण्डेशन , चित्रकूट द्वारा विज्ञान साक्षरता एवं विज्ञान संचार के माध्यम से पर्यावरण के प्रति युवाओं को संवेदित करने के लिए जनपद चित्रकूट के विभिन्न ग्राम पंचयतों में एक दिवसीय शिविर का आयोजन विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से किया गया । कार्यक्रम में ग्रामीणों को संस्था के बैनर तले पर्यावरण विज्ञान साक्षरता के प्रति समझ विकसित करना तथा विज्ञान मीडिया के माध्यम से प्राकृतिक संसाधन के संरक्षण के प्रति संवेदित करना तथा प्राकृतिक संसाधन के पुर्न उपयोग की प्रवृत्ति विकसित करने के उद्देश्य से बुन्देलखण्ड डिवपलपेन्ट चित्रकूट द्वारा कार्यशाला का आयोजन ग्राम पंचायत बूढा सेमरवार , नॉदी तौरा , हरदौली रमपुरिया तथा भंभई मे किया गया ।

 श्री आदित्य कुमार मिश्रा ने कार्यक्रम के उद्देश्यों को बताते हुए कहा कि मानव कल्याण एवं सम्पूर्ण वातावरण की सुरक्षा हेतु किये जाने वाले सार्थक एवं दिशात्मक प्रयास , पर्यावरण संरक्षण के बिना संभव नहीं है । आज के समय में पर्यावरण सुरक्षा को लेकर प्रत्येक व्यक्ति का सजग होना अति आवश्यक है जब तक प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं हो जाता तब तक हमारे सामने पर्यावरण संरक्षण का सवाल हमेशा खडा रहेगा । यदि हम पर्यावरण पर अत्याचार करते है तो इसकी सुरक्षा और संरक्षण का दायित्य भी हमारा ही है । 

मनुष्य एवं अन्य जीव अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए पर्यावरण पर ही आश्रित होते हैं । प्रकृति मे संसाधनो के विशाल भंडार सीमित होते हैं जिनका समुचित एवं बुद्धिमत्तापूर्ण प्रयोग हो । शुद्ध हवा शुद्ध पानी तथा शुद्ध भोजन आदि के लिए पर्यावरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । श्री अशोक कुमार मिश्रा ने ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुए कहा कि बुन्देलखण्ड मे ग्रामीण अधिकतर लोग कृषि पर निर्भर है यहाँ कही सूखा तो कही अति जल वृष्टि तथा कही बेमौसम बारिश होने से किसानो की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है । ग्रामीणो को कृषि उपज बढाने के लिए कम पानी वाली खेती करना चाहिए तथा बंजर भूमि को उपजाउ बनाने के लिए परमपरागत तथा वैज्ञानिक व विज्ञान साक्षरता के ढंग से खेती करना चाहिए वैज्ञानिक ढंग से खेती करने से लोग कम लागत कम मेहनत पर अधिक उपज कर सकते है जिससे की अपने जीवन में आर्थिक खुशहाली ला सकते है । 

वर्तमान परिदृश्य मे हमे अवश्यकता है ऐसे वृक्षो को लगाने की जिनकी अपनी जड़ो मे जल संग्रहण एवं संधारण करने की क्षमता अधिक हो ऐसे वृक्षों के समूह को पंच पल्लव की संज्ञा दी जाती है जैसे पीपल , बरगद , पाकड , गूलर और आम । डा ० प्रभाकर सिंह से अपने उद्बोधन में कहा कि बुन्देलखण्ड के ग्रामीण अधिकतर कृषि पर निर्भर है और उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नही है जिससे कुपोषण , बाल मजदूरी और पलायन जैसी समस्यओ का सामना करना पड़ता है जिससे निपटने के लिए ग्राम वासियो को वैज्ञानिक तरीके से औषधीय प्रजाति के पौधे लगाना चाहिए तथा औषधीय खेती ( जैसे- सफेद मूसली , एलोवेरा ) की भी खेती वैज्ञानिक तरीके से युवाओ को आगे आना चाहिए । श्री शंकर दयाल ने ग्रामीण युवाओं को पर्यावरण के प्रति संवेदित करते हुए कहा कि पर्यावरण का मतलब केवल पेड पौधे लगाना ही नही है ।

 हम अपने पास पडोस के प्राकृतिक संसाधनो को सुरक्षित एवं संरक्षित कर उनको पुनः उपयोग में लाकर भी पर्यावरण के प्रति अपनी दायित्वो का र्निवहन कर सकते हैं । आगे अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि गाव की सफाई बायो गैस ( गोबर गैस संयंत्र ) के माध्यम से वन सम्पदा संरक्षण उर्जा संरक्षण तथा मृदा स्वास्थ्य सुधार व जैव विविधता संरक्षण के लिए युवाओं को प्रेरित किया गया । जलवायु परिवर्तन के कारण जगह - जगह भूमि सूख रही है पानी के स्त्रोत सूख रहे है । नदियो मे पानी की कमी होने से नहरे सूख रही हैं । इन्ही कारणो से मेढको की संख्या भी कम हो रही है । चित्रकूट जनपद मे लगभग 80 प्रतिशत पेय जल हेतु मॉ मन्दाकिनी के जल का उपयोग किया जा रहा है । मॉ मन्दाकिनी का पानी प्रत्येक वर्ष लगभग जून माह में एक मीटर कम हो जाता है । यदि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकारो का ध्यान इस ओर नही गया तो वह दिन दूर नही जब पीने के पानी के लिए हाहाकार मच जायेगा । 

धरती के बढते तापमान के कारण कही ग्लेशियर पिघल रहे तो कही फसले चौपट हो रही है तो कही प्राणियों की जाती संकटमय हो गयी है । कही चक्रवात होने से फसले चौपट हो रही तो कही सूखा पड़ रहा है । इन समस्यओ से निपटने कि लिए हमारे युवा साथियो को विज्ञान साक्षरता एवं विज्ञान मीडिया के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनो का संरक्षण करते हुए अपने आस पास पडोस के गांव के लोगों को भी जागरूक करना चाहिए । श्रीमती ममता सोनी जी ने बताया की 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाया जाता है । 

मानव शरीर को स्वस्थ व निरोगी बनाये रखने के लिए योग व पर्यावरण दोनों की ही महत्वपूर्ण भूमिका है । योग भारत की एक सास्कृतिक और आध्यातमिक विरासत है । आज योग दुनिया भर में प्रचलित है जो लोग इसका दैनिक अभ्यास करते है वह अपने आप को शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक उर्जान्वित महसूस करते है । कार्यक्रम मे विषय विशेषज्ञ तथा कार्यकर्त्ता लवलेश सिंह ,रवि शंकर सहित लगभग एक सैकड़ा से अधिक लोगो की सहभागिता रही ।