सिर्फ दिखता आंसु

रस नहीं जिंदगी में

आखिर दोषी कौन

संवरने के वक्त

करते रहे मोटरगस्ती

बंद हो गये जब रास्ते

हवा हो गई हवाबाजी

धड़ाम से जब गिरे

तंगी से जब घिरे

तब कह रहे

रस नहीं जिंदगी में

आखिर दोषी कौन

संवरने के वक्त

करते रहे मनमानी

सलाह को समझे बकवास

वक्त को पहचाने नहीं

अकड़ में रहे अकड़ते

भ्रम से रहे जकड़ा

परिजनों को देते रहे धोखा

ऐसे लोग रोते ताजिंदगी

जिंदगी में रस नहीं

सिर्फ दिखता आंसु । 

©  राजेश देशप्रेमी