"आत्मविश्वास जीवन की पूँजी है"

आत्मविश्वास के साथ ज़िंदगी को सकारात्मक सोच लिए देखने का हुनर जिसने सीख लिया, उसने समझो सांसारिक समुन्दर बड़ी वीरता से पार कर लिया। प्रति पल बदलते भावों के आधीन हम एहसास की रोशनी में बह जाते है, खयालों को घूँट-घूँट पीते पूरी तरह भावनाओं के नशे में गिरफ़्त हो जाते है। दिमाग हमें दो रास्ते दिखाता है एक साफ़ सरल सकारात्मक ऊर्जा से भरा। दूसरा नकारात्मक प्रभाव से लबालब तमस घिरा जिस पर चलकर मन गोते खाता रहता है। नकारात्मक ख़यालों की बेवजह की कश्मकश दिलो दिमाग में हलचल पैदा करते हमारे आत्मविश्वास पर वार करते वजूद को कतरा-कतरा बिखेर देती है।

मन एक अच्छी सोच का निर्माण करता है पर पीछे असंख्य नकारात्मक ख़याल सीमा तोड़ कर दिमाग पर आक्रमण करते उस भाव के साम्राज्य को तहस-नहस कर देते है। ख़यालों की रफ़्तार के आगे बेबस हम बह जाते है ख़यालों के आकर्षण की लहरों संग मन की चंचलता एक ऐसा प्रवाह है जो हमारे देह की हर इंद्रियों पर अपना हक जताते काबू करने की कोशिश करता है इस स्थिति से उबरने का उपाय सिर्फ़ सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और खुद को खुद पर का यकीन मात्र है।

भूतकाल की स्मृतियाँ और भविष्य का ख़ौफ़ दिखाकर मन भ्रमित करता है हमें, और वर्तमान के सुनहरे पलों को हमारे हिस्से से छीन लेता है, कमज़ोर विचारों के आगे घुटने टेकने वाला मन इंसान को दिशाहीन बना देता है लक्ष्य की धुरी से फ़िसल कर नकारात्मक प्रभाव में बहा ले जाता है।

अगर हम आत्मविश्वास की कमी के साथ ठोकर दिलाने वाली नकारात्मक कमज़ोरी से त्रस्त है तो उससे परे हमारे भीतर एक सकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत भी बहता है, तो हंमेशा उस ऊर्जा के स्त्रोत पर अटूट विश्वास रखना चाहिए। जब हताशा की लहरें हमें अपनी ओर खिंच रही हो तब अपने भूतकाल को हर खराब अनुभव के साथ स्वीकार करो, अपने वर्तमान को आत्मविश्वास के साथ सँवारो, और अपने भविष्य का बिना डरे सत्कार करो फिर एक मजबूत और हिम्मतवान इंसान बनकर खुद को स्थापित करो। खुद पर कमान मजबूत शख़्सीयत की नींव होती है, शांत मन इंसान की दक्षता और कुनेह है।

जब किसीकी गलत बात या गलत विषय वस्तु पर आप निरर्थक दिमाग नहीं चलाते तो अपनी ज़िंदगी की दिशा निर्देश की कमान भी किसी ओर के हाथों में मत दो, विरोध करना भी एक हुनर है सीख जाओ। ना कहना गलत नहीं जिस बात को करने की अनुमति अपना मन और हृदय ना दें वो करने की जुर्रत मूर्खता है, कमज़ोरी है, और डर का दूसरा नाम है। 

भावनाओं को कुशाग्र बुद्धि पर हावी होने का अधिकार कभी मत दो, अपने वजूद की तलाश खुद के अंदर करो और प्रभुत्व पाकर बेहतरीन शख़्सीयत का प्रमाण दो। आत्मबल का स्त्रोत बहता है हमारे भीतर डर को जड़ से काटने पर फूट पड़ेगा सकारात्मकता का झरना। जो डर और झिझक की असंख्य परतों के पीछे बंदी पड़ा है। भावनाशील होना बुरा नहीं पर मूर्खता की दहलीज़ ना लाँघे एक सीमा तक भावनाओं को सिमित रखिए।

निडरता को सौंप दो अपना वजूद बस आँखें काफ़ी है, बात करते वक्त हर किसीसे मिलाना सीख लो, एक व्यक्तित्व उभर आएगा अपने आप में आत्मविश्वास का ब्युगूल बजेगा।

मात खाना और हारना ज़िंदगी का हिस्सा सही पर उसे आदत बनाना खुद के प्रति अन्याय है। कमज़ोर खयालों को बंदीश में रखो अपने सपनों की ज़मीन पर कदम रखने की इज़ाज़त मत दो। एक ज़िंदगी में से अपने लिए आसमान चुनना है तो हिम्मत और हौसलों का दामन थामें नज़रों को लक्ष्य की सरहद पर तैनात करो और पीछे मूड़ कर देखने की आदत को बदल दो। बस कुछ ही कदमों पर आपकी मंज़िल खड़ी है हर खुशीयों को आगोश में भर लो।

भावना ठाकर 'भावु' बेंगलोर