"हरियर बनाबो ग चल धराती ल"

हरियर बनाबो ग चल धरती ल

सुग्घर बनाबो ग चल धरती ल

नांन्हे-नांन्हे बिरवा लगाबो

जुर-मिल के सब एला सजाबो

जंगल बनाबो ग चल धरती ल

हरियर बनाबो...


रुनझुन झाड़ी-झाड़ी

झुनकुर झाड़ी-झाड़ी

सुग्घर छइहा राहय

झुम-झुम के भवँरा नाचय

बागे बनाबो ग चल धरती ल

हरियर बनाबो...


डाहर के आजु-बाजू

घर-घर के आघु-आघु

परिया घलो झन छुटय

फुलवारी साही लागय

सिंगारी करबो ग चल धरती ल

हरियर बनाबो....


नदिया के तीरे-तीरे

नरवा के खाल्हे-खाल्हे

तरिया के पारे-पारे

रुखराई म सिंगारे

छइहा बनाबो ग चल धरती ल

हरियर बनाबो...


बारी के आरी-आरी

खेती के खारी-खारी

टिकरा के टारी-टारी

कछरी के धारी-धारी

जुड़हा बनाबो ग चल धरती ल

हरियर बनाबो...


गावें के गली-गली

शहर के पारा-पारा

गाँवे के चउक-चौपाळा

देवता के धाम-देवाला

मधुबन बनाबो ग चल धरती ल

हरियर बनाबो....


अंचरा-हरियर लहरावय

हरियर लुगरा कस लागय

धरती मनभावन लागय

धरती ह सुहावन लागय

सुहागिन बनाबो ग चल धरती ल

हरियर बनाबो...


रचनाकार:-

अशोक पटेल "आशु"

व्याख्याता-हिंदी

तुस्मा,शिवरीनारायण(छ ग)

9827874578