पेट्रोल-डीजल को लेकर राहत, अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में लगातार घट रहे क्रूड ऑयल के दाम

नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल को लेकर आम आदमी को राहत मिल सकती है। पेट्रोल और डीजल के दाम आने वाले दिनों घट सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार क्रूड ऑयल के दाम घट रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतें अपने हाल के हाई  लेवल से नीचे आ गई हैं। बता दें कि भारत में तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों के हिसाब से तय होती है। 

आपको बता दें कि केंद्रीय बैंकों द्वारा मोनेटरी पाॅलिसी में बढ़ोतरी और कमोडिटी के लिए कमजोर मांग की संभावना के बाद ग्लोबल अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका के कारण क्रूड ऑयल  के दाम में गिरावट आई है। वहीं, चीन के कुछ हिस्सों में कोविड के कारण लॉकडाउन चल रहा है इससे भी कीमतों में गिरावट आई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल वायदा वर्तमान में लगभग 110 डॉलर प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जबकि हाल ही में इसकी कीमत लगभग 123 डॉलर प्रति डॉलर थी। 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटीज) तपन पटेल ने कहा कि नियर टर्म सपोर्ट 98 डॉलर प्रति बैरल है, जबकि रेजिस्टेंस 123 डॉलर प्रति बैरल है। सचदेवा ने कहा कि इसके अलावा, पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) और उसके सहयोगियों ने जुलाई और अगस्त में एक दिन में लगभग 648,000 बैरल उत्पादन बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है, जो पहले से लगभग 432,000 बैरल प्रति दिन की तय वृद्धि से लगभग दो-तिहाई अधिक है। उत्पादन बढ़ाने के इस समझौते का भी कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना है।

आपको बता दें कि जून 2010 तक सरकार पेट्रोल की कीमत निर्धारित करती थी। हर 15 दिन में इसे बदला जाता था। 26 जून 2010 के बाद सरकार ने पेट्रोल की कीमतों का निर्धारण ऑयल कंपनियों के ऊपर छोड़ दिया। इसी तरह अक्टूबर 2014 तक डीजल की कीमत भी सरकार निर्धारित करती थी। 19 अक्टूबर 2014 से सरकार ने ये काम भी ऑयल कंपनियों को सौंप दिया। वर्तमान में ऑयल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत, एक्सचेंज रेट, टैक्स, पेट्रोल-डीजल के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और बाकी कई चीजों को ध्यान में रखते हुए रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमत निर्धारित करती हैं।

आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स में कमोडिटीज एंड करेंसी के निदेशक नवीन माथुर के अनुसार, "एक तरफ ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की कमी और दूसरी ओर तेल की ऊंची कीमतों के कारण ओएमसी को कम मार्जिन से निचोड़ा जा रहा है, जिसके कारण शेयरों में गिरावट आई है। बीपीसीएल और एचपीसीएल के शेयर -सप्ताह के निचले स्तर पर गिर गया है। शेयर की कीमतें नुकसान पर लड़खड़ाती रह सकती हैं।