मोह ना रखें मोह कभी-कभी घातक भी होता

आज दिल वेदना से भरा हुआ इस कदर घायल हो चुका था कि अपने जज्बातों को रोकना पा रहे हैं और अपनी वेदना ओं को कलम के जरिए आप सभी तक पहुंचाने के लिए मेरी कलम ने मुझे मजबूर कर दिया मेरी वेदना का कारण आज सिर्फ मोह है , मोह भी एक ऐसी चीज है जो इंसान को इतना अधिक किसी के प्रति मोहित कर देती है कि उस चीज के दूर चले जाने के बाद दिल घायल उसी चीज को याद करते-करते बिलख पड़ता है । परंतु अपनी वेदनाओं को अपने आंसुओं को अपने ही परिवार से छुपाकर सीने में मुझे दफनाना पड़ा यदि आज मेरे आंसू बाहर निकल आएंगे तो मेरे बच्चे जो मुझ से अधिक मोह हो अपने प्रिय छोटे से बेजुबान बिल्ली के बच्चे में रखते हैं वह भी बिलख पड़ेंगे । 

मात्र 18 दिन पहले हमारे घर में कहीं से भूले भटके एक बिल्ली का बच्चा आ गया था , वह बच्चा इतना छोटा था कि उस बच्चे को घर से बाहर निकालने की भी इच्छा नहीं थी यदि हम उसे बाहर छोड़ देते तो जरूर वो लावारिस पशुओं की शिकार हो जाती और मारी जाती यही सोच कर बच्चे को हमने अपने घर में शरण दी दिन-रात उस बच्चे के साथ मेरे बच्चे मेरे पति और मैं खुद भी उसके साथ खेलती रहती थी उसके साथ बातें ऐसे करती थी जिससे कि वह मेरी बातें समझ रही है छोटा सा बच्चा होने के कारण रात को भी वह मेरे सिरहाने ही सोती थी कभी-कभी तो वह मेरे हाथ पर रात भर सोती रहती थी और पूरी रात वह मुझे परेशान नहीं करती थी किसी कारणवश उस बिल्ली के छोटे से बच्चे की मृत्यु हो गई । 

ऐसा लगा जैसे मेरे ही परिवार का कोई सदस्य हो गया था वह बच्चा और आज उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई परंतु मन वेदना हों से भरा हुआ है मेरे बच्चे बिलख- बिलख कर रो रहे थे । मेरे पति भी बहुत उदास मन से अपने काम पर गए और जाते-जाते बोल गए कि मेरा मन बिल्कुल नहीं लग रहा है आज बहुत दुख हो रहा है और मैं सबको समझाती रही कि हमारे लिए जीवन उस विधाता ने तय किया है जिसको जितना जीवन देगा उसकी जिंदगी उतनी ही होगी मोक्ष कैसे प्राप्त हुआ यह कैसे प्राप्त होना है यह तो वह विधाता ही तय करता है अधिकतर हमने देखा है कि कई लोग तो बैठे-बैठे कुर्सी पर ही मोक्ष प्राप्त करते हैं यह भी सुना है कि कुछ लोग तो कीर्तन सुनते सुनते मोक्ष को प्राप्त हुए कारण कुछ नहीं होता , ना कोई बीमारी होती है परंतु भगवान ने जैसा तय किया है जिसके लिए वैसा ही होना है हमारा मकसद था उस बिल्ली के बच्चे को बाहरी लावारिस जानवरों से बचाना सोच अच्छी थी परंतु विधाता को कुछ और मंजूर था उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई परंतु जो हमारा मोह उसमें पड़ चुका था वह मोह आज वेदना से मेरे पूरे परिवार को भर गया , ऐसे अनगिनत किससे मैंने सुने हैं जिसमें लोग अपने घर में इन बेजुबान ओं को कोई शौकिया तौर पर तो कोई किसी को शरण देने के अनुसार अपने घर में जगह देता है सालों साल कईयों के घर तो उनके पालतू पशु उनकी जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बन टीक जाते हैं वह भी घर का एक अभीन्न हिस्सा बनकर घर में रह जाता है।  

इसी अभिन्न हिस्से को कहा जाता है मोह । मोह सच इंसान को इतना बेबस कर देती है कि इंसान मोह के चक्र में फस कर धंसता ही चला जाता है।। इस अंधे मोह का पता तब चलता है जब वह मोहित चीज या तो गुम जाती है या यदि वह हमारे पालतू जानवर हैं तो उनके जाने के बाद , हाल ही में एक किस्सा ऐसा सुना था जिसके अंतर्गत एक मालिक का पालतू जानवर मोक्ष को प्राप्त हुआ तो उस मालिक का बच्चा डिप्रेशन में चला गया और इतना अधिक  डिप्रेशन में चला गया कि वह अपना दिमागी संतुलन ही खो चुका था । आज‌ जो सीख प्राप्त हुई है वही सीख आप सभी से साझा करना चाहूंगी हम अपने घर में बेजुबानों को आसरा दें परंतु उनमें मोह ना रखें । यह मोह अंदर से हमें तोड़ देती है । यह मोह सिर्फ बेजुबानों के प्रति ही नहीं अपितु इंसान का इंसान के प्रति भी हो सकता है या इंसान का किसी वस्तु विशेष के लिए भी हो सकता है । इसलिए मोह , जज़्बातों से नहीं बस इंसानियत, और सिर्फ मानवता सेवा , समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझ कर ही कार्य करें । हृदय से ना लगाएं।।

वीना आडवाणी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र