धुंधली यादें

दिल में धुँधली यादों का भरा पिटारा है।

जिनसे मिला था मुझे बहुत सहारा है।

कभी दुआ नेह प्यार भरा था सारा है।

इस जीवन का वह पुंज बड़ा ही प्यारा है।।


माँ लेकर स्कूल मुझे जब जाती थी।

दूर तलक नजरें उसकी मुझे ताकती थी।

मेरे न जाने पर प्रलोभन दिया करती थी।

कभी कंपट कभी चुर्रे खरीदा करती थी।।


  पापा जब बाहर गांव से आते थे।

  भर भर थैला आम वहाँ से लाते थे।

  बड़े-बड़े आम मुझको बहुत भाते थे।

  जिससे भाई बहन मेरे मुझसे लड़ जाते थे।।


  दादी बाबा की मैं बहुत प्यारी थी।

  उनमें ही बसती जान हमारी थी ।

  उनके खाने का ख्याल मैं रखा करती थी।

  धुँधली सी वो यादें मुझे बहुत प्यारी थी।।


  काश की वह वक्त लौटकर आ जाए।

  मेरे दिल में सुकून बहुत सा छा जाए।

  परेशानियों का सिलसिला कहीं खो जाए।

  धुँधली यादों की खुशियों में समा जाए।।


गीता देवी

औरैया, उत्तर प्रदेश