मिट्टी के माधव (कटाक्ष)

इस धरती पर पैदा होने में दो ही वर्गों को फायदा है पहला अपर क्लास  जो सोने का चम्मच लेकर मुंह में पैदा होता है... सारे रईसी ठाट बाट सरकारी तंत्रों मे येन केन प्रकारेण वह अपना हिसाब जमा कर पूरा कर लेता है और मजे से जिंदगी गुजारता है ना उसे कानून से डरने की जरूरत होती है ना महंगाई, बेरोजगारी उसे परेशान करती है देश की सारी सुख सुविधाओं का भोग करता हुआ वह परमसुख वाला परम सुखी आत्मा होता है।

और दूसरा है लोअर क्लास इसके भी राशन पानी से लेकर ,बिजली के बिल ,मकान ,लगान सब अनेक योजनाओं द्वारा सरकार व्यवस्था कर देती है अपर क्लास वाला भले सरकार से ना डरता हो लेकिन लोअर क्लास वाले से सरकार जरूर डरती है हिंदुस्तान में गरीब पैदा होना भी एक क्वालिटी है जिसके अपने मजे हैं ना काम करने की चिंता ...ना राशन पानी की चिंता है ना रोजगार की मारामारी.... बस चुनाव के समय अपनी नजरें तीक्ष्ण बनाए रखना कि कौन सी पार्टी सबसे ज्यादा लॉलीपॉप बांट रही है उसके बाद उस पार्टी के सिर पर हाथ रखकर उसकी जीत सुनिश्चित कर देना  फिर सारी समस्याएं खत्म...।

और बचा मिडिल क्लास यह वर्ग मिट्टी का माधो वर्ग है.. जिसके कमजोर कंधों पर अपर ,लोअर, सरकार तीनों का भार रहता है ना उसे अपर क्लास वालों के जैसे रईसी मयस्सर होती है न लोअर क्लास वालों के जैसे गरीबी मयस्सर होती है और ना ही सरकारी सुविधाएं ,ना उसका बिजली का बिल माफ हो सकता है ना उसे मुफ्त की बिजली मिल सकती है... हां समय से टैक्स देने की बाध्यता जरूर होती है वरना जिन चिथडो में लपेट कर अपनी इज्जत बचाए रखता है उसका लूट जाना तय है अपर और लोअर क्लास को महंगाई, बंदी, बेरोजगारी होने का कोई असर नहीं पड़ता जो असर पड़ता है वह मिडिल क्लास वालों की दुर्गति होनी है... कब नौकरी छीन जाए कहा नहीं जा सकता.. कब बिजली बिल का आरसी कट जाए... मिडिल क्लास  अपने आप में धुरंधर  है.. जिसका  कोई तारणहार नहीं है उसका बस अपना ही साथ अपना ही आस है।

रेखा शाह आरबी

बलिया (यूपी)