एक नजर इधर भी,--- दिल है कि मानता नहीं

बात पर्दे के पीछे की।

जखनियां/गाजीपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि नशे की आखिरी मंजिल का नाम बर्बादी है। सबकुछ के बावजूद आज की युवा पीढ़ी उक्त सच्चाई को झुठलाने में लगी हुई है। बदन झुलसा देने वालीआसमान से बरसती आग नीचे तपती जमीन,और तन बदन‌ से अनवरत बहता पसीना सबका हाल बेहाल बनाकर रख दिया है। फिर भी "मुझे पीने का शौक नहीं ,पीता हूं ग़म भुलाने को"की तर्ज़ पर पीने पिलाने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है।

आज का युवा वर्ग तो इसे अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। यही वजह है कि ताड़ी खाना हो अथवा शराब खाना सब जगह भीड़ ठसमठस है। आगे आओ पीछे पाओ की स्थिति में कालर धराई से लेकर फाइटिंगबाजी तक का नजारा दिखाई देने लगा है।देखने में लोगों को बड़ा मज़ा भी आ रहा है।फिर भी पीने वालों की  जमात में कुछ ऐसे भी घोंचू हैं जो घर के चोरी छिपे  अपना काम बना लेते हैं।फिर भी एक दिन  सच तो सामने आ ही जाता है। बात जखनियां तहसील क्षेत्र के मनिहारी विकास खंड की है। 

जहां हाल ही में शादी शुदा एक युवक जिसकी सारी बुरी लत छिपाकर  शादी करदी‌ गई। अभी‌ शादी हुए बमुश्किल दो महीना ही बीता होगा।बीबी से चोरी  चोरी दारू से कंठ सिंचन करने वाला  मियां बीते सोमवार को‌ शीतल पेय के दो बोतल लेकर देर शाम घर लौटा ।एक में शीतल‌पेय था तो दूसरे में  शराब। खुद का पसंदीदा पेय पदार्थ।अपना अपने पास रखकर दूसरा बीबी के हाथों में सौंप दिया। 

चालाक बीबी को दाल में कुछ काला नजर आया तो एक दूसरे का बोतल बदल डाली सच सामने आने की डर से  मियां के हाथ पांव फूल गए। सात्विक बीबी के चिखने चिल्लाने पर हाथ जोड़ते हुए कहने लगा , धीरे धीरे बोल कोई सुन ना ले।सुन ना ले कोई सुन ना ले। भविष्य में नशा नहीं करने की कसम भी खाया। मगर मधुशाला के चौखट पर दस्तक देने से बाज नहीं आया। इसलिए कि दिल है की मानता नहीं। 

(गौरीशंकर पाण्डेय सरस)