जजी आवासीय परिसर में पौधरोपण

बांदा। प्रकृति ने पेड़ों का अपना अलग महत्व है। जल, जंगल जमीन के साथ जुड़े हुए वृक्ष मानव जीवन के आधार ही नहीं बल्कि औषधि के साधन भी हैं। रविवार को पर्यावरण दिवस पर जजी आवासीय परिसर में पौधरोपण कर जजों ने भी पेड़ों की प्राथमिकता और उनके मानव जीवन के साथ जुड़े हुए मूल तत्वों की पुष्टि कर दी। परिसर में उपस्थित जजों ने ज्यादातर अशोक के वृक्ष लगाए। 

विश्व पर्यावरण दिवस पर जजी आवासीय परिसर में बांदा जजी अदालत में तैनात सभी जजों ने वृक्ष लगाकर पर्यावरण को शुद्ध रखने और व्याप्त होते जा रहे प्रदूषण से मुक्त करने के लिए वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया। यहां पर जजों द्वारा अशोक के वृक्ष लगाए गए। प्रभारी जिला जज मोहम्मद अशरफ अंसारी के भाव में वृक्षारोपण को लेकर मानव और प्रकृति को एक दूसरे का पूरक मानते हुए कुछ ऐसा मानना था कि जहां-जहां प्रकृति का दोहन हुआ है । 

वहां-वहां संस्कृति का विलोपन हो गया और तो और उपजाउ जमीनें मरुस्थल बन गई। इन दिनों लगातार हो रहे प्रकृति के दोहन और पौधों के साथ कुठाराघात हमलों के चलते बिगड़ते पर्यावरण और बढ़ते प्रदूषण पर अपर जिला जज ऋषि कुमार ने कहा कि हम सभी के जीवन जीने की शैली भी पर्यावरणीय होना चाहिए। इससे हमें लक्ष्य हासिल हो सकते हैं। सीजेएम भारतेंदु गुप्ता ने वृक्षारोपण के दौरान कहा कि यदि हम समय रहते नहीं संभले तो प्रकृति दोबारा संभलने का अवसर नहीं देगी।

 पृथ्वी में लगे किस्म-किस्म के पेड-पौधों को लेकर सीनियर डिवीजन सिविल जज नदीम अनवर ने उन्हें मानव जीवन के लिए प्रकृति का उपहार माना। पेड़पौधों को नष्ट करना मानव जीवन और समाज के लिए एक खतरनाक कार्यशैली। सिविल जज जूनियर डिवीजन कु.सौम्या मिश्रा ने कहा कि आयुर्वेद में पेड़-पौधों और जड़ी-बूटी ही जीवन के गंभीर मर्जों का इलाज है। 

सिविल जज जूनियर डिवीजन कंचन मिश्रा ने बात को आगे बढ़ाते हुए वृक्षारोपण के दौरान कहा कि जब पुराने काल में वर्तमान जैसे बड़े-छोटे अस्पताल नहीं होते थे तब आयुर्वेद पद्धति में प्रयोग होने वाले पेड़-पौधे और जड़ी-बूटियां ही गंभीर मर्जों के इलाज का साधन बनती थी। सिविल जज जूनियर डिवीजन कु.शालिनी ने भी पेड़-पौधों के महत्व को मानव जीवन का मुख्य आधार मानते हुए उनकी रक्षा करना जरूरी बताया।

 वृक्षारोपण के इस अवसर पर सेंट्रल नाजिर चिंतामणि अवस्थी, सचिन यादव, हेमनाथ, छोटेलाल आदि कर्मियों ने भी स्वस्थ संसार और समाज के लिए पेड़-पौधों को बचाने और उनको लगाने की विधा पर बल देते हुए कहा कि आज वह वक्त आ गया है जब पेड़-पौधों की उपयोगिता पर आम आदमी को जागरूक होना चाहिए।