ईश्वर सत्य शिव और सुंदर है

सृष्टि सारी ईश्वर की बनाई,

युगों युगो से चलती आई।

बनाने वाला है ईश्वर,

सत्य शिव और सुंदर ईश्वर।


कल्याणकारी बड़ा है ईश्वर,

ऊंचे पर्वत उसने बनाएं।

जलप्रपात फिर बह निकले,

वह हमारे प्राणों का आधार।


सारी सृष्टि का तारणहार,

उसमें रमता सब संसार।

सब में  ही वह रमता,

पर नहीं किसी को भी दिखता।


चींटी से हाथी में बसता,

सबका वह ध्यान है रखता।

फूलों में खुशबू बन रहता,

जीवन की सांसों में बसता।


कृपा उसकी है चारों ओर,

दया उसकी बरसे हर ओर।

किसी को भूख वह न सुलाएं,

रग रग में सबकी बस जाए।


कर्म सब जग  के करवाता,

हृदय में प्रेरणा बन बस जाता।

संचालक वह अद्भुत  प्यारा,

सोच कर मेरा मन भरमाता।


देखो जो मैं उसकी सृष्टि को,

दांतो तले उंगली दबाऊँ।

आकाश तो इतना बड़ा है देखो,

खड़ा नहीं कोई खंबा देखो।


सत्य शिव और सुंदर ईश्वर,

महिमा उसकी कैसे करूं मैं वर्णन।

सूरज चांद तारों से सजी धरती,

सबके खाने की व्यवस्था करी।


कभी दूर कभी पास है लगता,

वह तो सबके हृदय में बसता।

सांसों का आना-जाना उससे,

हर धड़कन का हिसाब है रखता।


कितनी कोशिश करें जमाना,

पहुंच नहीं वहां तक पाएगा।

ईश्वर सत्य  शिवम्औ सुंदर,

जग का है कल्याण करता।


मानव उसको ढूंढता ऐसे,

मृग मरीचिका हो जैसे।

मैं तो सबके साथ चलता,

पग पग पर सबका ध्यान है रखता।

ईश्वर सत्य है शिव है सुंदर।।


          रचनाकार

          मधु अरोरा