वक़्त गुज़र ही जाता है

अच्छा बुरा जैसा भी,

वक़्त गुज़र ही जाता है,

रेत के मांनिद हाथ से,

वह फिसल ही जाता है।


कहते हैं वक़्त के साथ चले जो,

वक़्त उन्हें अपनाता है,

किन्तु वक़्त मनमौजी ठहरा,

वह कहाँ किसी का बन पाता है।


कभी सुखद अनुभूति ,

कभी दुःखद स्मृति,

वक़्त आता और जाता है।


वक़्त बलवान कहलाता है,

एक क्षण में राजा रंक हो जाते,

दूजे पल निर्धन को धनवान बनाता है।


यह अपने संग औरों के रंग दिखता है,

वक़्त पर जो काम ना आये,

ग़ैर उन्हें बतलाता है।


कुछ अच्छाई ,कुछ बुराई साथ लिए,

हर्ष तो कभी ग़म का आभास लिए,

पग- पग राह दिखाता है।


अच्छा बुरा जैसा भी ,

वक़्त गुज़र ही जाता है.....


       रीमा सिन्हा (लखनऊ)