RR vs CSK Analysis: सैमसन के प्रयोग ने राजस्थान को दिलाई जीत

राजस्थान को जीत के लिए 20 ओवर में 151 रन बनाने थे। 11 ओवर में टीम ने दो विकेट पर 75 रन बना लिए थे। टीम को 54 गेंद पर 76 रन बनाने थे। 12वें ओवर की दूसरी गेंद पर देवदत्त पडिक्कल आउट हो गए। उनके आउट होने के बाद रविचंद्रन अश्विन क्रीज पर आए। उन्हें देखकर सभी हैरान रह गए। शिमरॉन हेटमायर और रियान पराग जैसे बल्लेबाजों के होने के बावजूद अश्विन को भेजकर राजस्थान के कप्तान संजू सैमसन ने बड़ा रिस्क लिया। उनका यह प्रयोग सफल रहा। अश्विन ने टीम को जीत दिला दी।

अपनी पुरानी टीम के खिलाफ अश्विन ने एक यादगार पारी खेली और राजस्थान को अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंचा दिया। 2008 के बाद यह पहला मौका है जब राजस्थान की टीम लीग राउंड समाप्त होने के बाद शीर्ष-दो में रही। क्वालीफायर-1 में 24 मई को उसका मुकाबला शीर्ष पर रहने वाली गुजरात टाइटंस से होगा। 

दूसरी ओर, महेंद्र सिंह धोनी की टीम पहले ही प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी थी। टीम जीत के साथ टूर्नामेंट का अंत नहीं कर पाई। इस बार बल्लेबाजों ने निराश किया। पहले 10 ओवर में 94 रन बनाने वाली टीम अंतिम 10 ओवरों में 56 रन ही बना सकी। महेंद्र सिंह धोनी जैसे दिग्गज बल्लेबाज फेल हो गए। एन जगदीशन और अंबाती रायुडू रन नहीं बना सके। इसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा।

मैच में टर्निंग पॉइंट

18 गेंद में चेन्नई के तीन विकेट गिरे: चेन्नई ने सात ओवर में एक विकेट पर 83 रन बना लिए थे। आठवें ओवर की तीसरी गेंद पर अश्विन ने डेवोन कॉनवे को आउट किया। इसके ठीक सात गेंद बाद ओबेड मैकॉय ने एन जगदीशन को पवेलियन भेज दिया। फिर 10 गेंद बाद चेन्नई को एक और झटका लगा। अंबाती रायुडू को युजवेंद्र चहल ने देवदत्त पडिक्कल के हाथों कैच करा दिया। 18 गेंद में तीन विकेट गिर जाने के बाद चेन्नई की पारी धीमी हो गई। यहां से मैच ही बदल गया। राजस्थान ने मैच में वापसी की और चेन्नई को रन नहीं बनाने दिया।

दोनों कप्तानों का कैसा रहा प्रदर्शन?

सबसे पहले बात महेंद्र सिंह धोनी की। चेन्नई के कप्तान ने 28 गेंद पर 26 रन बनाए। जब तेजी से रन बनाने की बारी आई तो उन्होंने अपना विकेट गंवा दिया। उन्होंने अपनी पारी में एक चौका और एक छक्का लगाया। उनका स्ट्राइक रेट 92.86 का रहा। दूसरी ओर, संजू सैमसन ने रन चेज करने के दौरान शुरुआत तो अच्छी की, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल पाए। उन्होंने 20 गेंद पर 15 रन बनाए। उनके बल्ले से दो चौके निकले। सैमसन का स्ट्राइक रेट 75.00 का रहा।

चेन्नई के लिए क्या-क्या हुआ?

सकारात्मक पक्ष: बल्लेबाजी में मोईन अली ने कमाल का प्रदर्शन किया। सीजन में पहली बार मोईन अपने पूरे रंग में दिखे। उन्होंने 19 गेंदों पर अर्धशतक पूरा कर लिया। हालांकि, लगातार विकेट गिरने के बाद उन्हें धीमी बल्लेबाजी भी करनी पड़ी। मोईन ने 57 गेंद पर 93 रन बनाए। इस दौरान 13 चौके और तीन छक्के लगाए। गेंदबाजी में सिमरजीत सिंह, मिचेल सैंटनर और मोईन अली ने शानदार गेंदबाजी की। तीनों एक-एक विकेट लिए और रन भी कम दिए।

नकारात्मक पक्ष: मोईन अली को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज नहीं चला। ऋतुराज गायकवाड़, डेवोन कॉनवे, जगदीशन, अंबाती रायुडू और धोनी फेल रहे। धोनी ने 26 रन जरूर बनाए, लेकिन उन्होंने धीमी पारी खेली। आखिरी 10 ओवरों में सिर्फ 56 रन बनाने के कारण टीम को हार का सामना करना पड़ा। गेंदबाजी में मुकेश चौधरी, मथीशा पथिराना और प्रशांत सोलंकी महंगे साबित हुए। प्रशांत ने दो विकेट लिए। तीनों ने जमकर रन लुटाए। मुकेश ने चार ओवर में 41, पथिराना ने 3.4 ओवर में 28 और प्रशांत ने दो ओवर में 20 रन दिए।

राजस्थान के लिए क्या-क्या हुआ?

सकारात्मक पक्ष: गेंदबाजी में रविचंद्रन अश्विन, युजवेंद्र चहल और ओबेड मेकॉय ने शानदार गेंदबाजी की। तीनों ने विकेट लिए और रन भी कम दिए। अश्विन ने चार ओवर में 28 रन देकर एक विकेट अपने नाम किया। चहल ने चार ओवर में 26 रन दिए और दो विकेट लिए। मेकॉय ने चार ओवर में 20 रन देकर दो विकेट लिए। बल्लेबाजी में यशस्वी जायसवाल और अश्विन ने कमाल का प्रदर्शन किया। जायसवाल ने 44 गेंद पर 59 रन बनाए। वहीं, अश्विन ने 23 गेंद पर नाबाद 40 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई।

नकारात्मक पक्ष: टीम के दो तेज गेंदबाज ट्रेंट बोल्ट और प्रसिद्ध कृष्णा बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए। बोल्ट ने चार ओवर में 44 रन देकर एक विकेट लिए। प्रसिद्ध कृष्णा ने चार ओवर में 32 रन दिए। बल्लेबाजों में जोस बटलर टीम की सबसे बड़ी चिंता हैं। शुरुआती सात मैचों में तूफानी बल्लेबाजी करने वाले बटलर लीग राउंड के आखिरी सात मैचों में फेल रहे। प्लेऑफ में उनका फॉर्म में आना टीम के लिए जरूरी है। संजू सैमसन और देवदत्त पडिक्कल के प्रदर्शन में निरंतरता की कमी साफ तौर पर दिख रही है।