उबल रही महंगाई, बढ़ सकती है आपके लोन की EMI

नई दिल्ली : देश में महंगाई का कहर कम होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। अप्रैल में खुदरा महंगाई के सात फीसदी से ऊपर पहुंचने के बाद एक बार फिर से रिजर्व बैंक की ओर से रेपो दर में वृद्धि का आशंका बढ़ गई है। ऐसा होता है तो आपके कर्ज की मासिक किस्त (ईएमआई) और बढ़ सकती है। इस माह की शुरुआत में रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास के नेतृत्व में मौद्रिक नीति समिति ने अप्रत्याशित रूप से अचानक बैठक कर रेपो दर में 0.40 फीसदी बढ़ाने का फैसला कर दिया।

इसके अलावा रिवर्स रेपो में भी 0.50 फीसदी का इजाफा किया गया। रिजर्व बैंक के इस फैसले से उद्योग और विशेषज्ञ सभी आश्चर्यचकित रह गए। इसके बाद एचडीएफसी, एसबीआई, आईसीआईसीआई समेत देश के कई बड़े बैंकों ने कर्ज की दरों में 0.40 फीसदी तक का इजाफा कर दिया।इसके बाद अब आशंका जताई जा रही है कि रिजर्व बैंक जून की मौद्रिक समीक्षा में भी रेपो दरों में फिर इजाफा कर सकता है। ऐसा होने पर आपकी ईएमआई और बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि रिजर्व बैंक की ओर से दरें बढ़ाने को लेकर उतनी हैरानी नहीं हुई, जितनी अचानक और सीधे 0.40 फीसदी बढ़ाने से हुई। उद्योग को अनुमान था कि रिजर्व बैंक धीरे-धीरे दरों में इजाफा करेगा, लेकिन आरबीआई ने ऊंची महंगाई का हवाला देकर अंतत: रेपो में इजाफा कर दिया। इसके पहले आरबीआई गवर्नर कई बार कह चुके थे कि महंगाई से रिजर्व बैंक अकेला नहीं लड़ सकता और इसके लिए केंद्र के साथ राज्य सरकारों को भी आपूर्ति के मोर्चे पर सख्त कदम उठाने होंगे। इसके लिए तेल की कीमतों पर अंकुश लगाना होगा।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले कहा गया है कि मुद्रास्फीति के उम्मीद से अधिक होने से मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। इसमें कहा गया है कि मौद्रिक नीति के और सख्त होने की संभावना है। इसमें अनुमान जताया गया है कि चालू वित्त वर्ष की चार तिमाहियों में आरबीआई रेपो दर बढ़ाकर 5.4 कर सकता है। साथ ही विश्लेषकों का मानना है कि दिसंबर 2023 तक यह दर 5.75 तक बढ़ सकती है जो पहले के अनुमान से 0.50 फीसदी अधिक है।

भारत ने वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने के बीच विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) से अपनी भूमिका निभाने को कहा है। डब्ल्यूटीओ में राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि ब्रजेंद्र नवनीत ने भारत की तरफ से दिए गए बयान में यह आग्रह किया।

उन्होंने कहा वैश्विक व्यापार निकाय की सर्वोच्च प्राथमिकता अर्थव्यवस्थाओं में पुनरुद्धार और कोविड-19 महामारी के बाद और भू-राजनीतिक संकट के दौरान आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने की होनी चाहिए। स्थायी प्रतिनिधि ने कहा, वर्तमान स्थिति ने एक और नई बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है, जो अधिकांश देशों की अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती मुद्रास्फीति है। यह बयान चार मई को व्यापार वार्ता समिति (टीएनसी) और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख (एचओडी) की अनौपचारिक बैठक के दौरान दिया गया था।