वीणा की तार नाजुक

सिरहाने आज भी , तेरी ही तस्वीर  होती है

मेरे संग तेरी यादें मिल , तंहाई में सोती हैं।।


याद आता आज भी वो खिलखिलाता जीवन

उस खिलखिलाहट पर नजर सबकी होती है।।


लगी एसी नजर रिश्ते पर इस बेदर्द जमाने की

आज इस जमाने के लिए दिल में दुहाई होती है।।


हम तो सिर्फ तेरे थे सुनो मेरे हमराह मेरे हमदम

तोड़ा तुमने हमें आज चुपके से आंखें मेरी रोती है।।


टूटी वीणा के सुर फिर ना बज सुरीले होते कभी

जानते हो हर एक तार वीणा कि नाजुक होती है।।


वीणा आडवाणी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र