मधु लिमये जी

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

मधु लिमये जी की जन्मशती एक मई से शुरू हो रही है। गोवा को विदेशी दासता से मुक्त कराने के लिए उन्होंने कितनी यातनाएं सहीं। एक बार तो मरने तक की खबर फैल गई। बाद में झूठी साबित हुई। बारह साल की आजीवन कारावास की सजा तो उन्हें सुना ही दी गई थी। गोवा के समुद्र तट पर अग्वाड जेल की काल- कोठरी में बंद वे क्या क्या सोचते रहे होंगे? 

मधु लिमये जी सन् १९६३ के बाद चार बार लोकसभा के सदस्य रहे। महाराष्ट्र के खानदेश में पले बढ़े थे लेकिन चुनाव बिहार के मुंगेर और बांका से लड़ते रहे। आजकल तो लोग चुनाव के लिए सुविधाजनक क्षेत्र देखते हैं। संसदीय बहस की ऊँचाई क्या होती है इसका मानदंड मधु लिमये ने स्थापित किया। सत्तापक्ष के लिए वे 'कटु लिमये' थे। विधायी कार्यों के इतने बड़े जानकार कि एक बार समय पर सरकार को चेता दिया तो आनन फानन में संसद की बैठक बुलाकर गलती ठीक गयी, नहीं तो वित्तीय संकट खड़ा हो जाता। 

आजाद भारत के राजनेताओं व संसद-सदस्यों में कितनों ने मधु जी जैसा सादगी भरा जीवन जिया? दिल्ली में उनका सरकारी आवास बेहद सादा रहा। आराम की कोई चीज नहीं। न कूलर, न फ्रीज । 

आपातकाल के समय सांसदों की पेंशन शुरू हुई। मधु जी ने इसे  आपातकाल की अवैध संतान' कहा। उन्होंने पेंशन नहीं ली। स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भी कोई सरकारी सहायता स्वीकार नहीं की। जनता पार्टी की सरकार में मंत्री बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया। पुरुषोत्तम कौशिक का नाम आगे बढ़ाया। इंदिरा गांधी ने जब आपातकाल के समय संसद का कार्यकाल बढ़ाने की घोषणा की तो मधु लिमये ही थे जिन्होंने त्यागपत्र देकर विरोध किया और जीवन संगिनी चम्पा लिमये से कहा कि यथाशीघ्र सरकारी बंगला खाली कर दें। इस समय वे नरसिंहगढ़ जेल में बंद थे। 

मधु लिमये अपना खर्च किताबें लिखकर निकालते थे। एकसौ उनतीस किताबें लिखीं। सब एक से बढ़कर एक। संसद की लाइब्रेरी और तीन मूर्ति भवन लाइब्रेरी का जैसा उपयोग मधु लिमये जी ने किया वैसा अब विधायिका के सदस्य करते हुए दिखाई नहीं देते। मधु जी देश में समरसता चाहते थे। उन तत्वों के प्रति वे बड़े निर्मम रहे। उनकी किताब 'स्वतंत्रता आन्दोलन की विचारधारा' पढ़ने से उनके देशप्रेम को समझना सम्भव है। प्रख्यात समाजवादी नेता उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री पूर्वांचल के गांधी राम गोविंद चौधरी कहते हैं की समस्याओं का अंबार लगा हुआ है बेरोजगारी महंगाई सुरसा कि तरीके मुंह बाए है नेताओं की संपत्ति अनाप-शनाप बढ़ती जा रही है सत्ता मैं आसीन लोग जनता की बात सुनने को तैयार नहीं है छल प्रपंच कपट से सत्ता पर काबिज होकर जनता के सवालों को नजरअंदाज कर रहे हैं ऐसे  में मधु लिमए बहुत याद आ रहे हैं श्री चौधरी ने कहा की अपना सर्वस्व निछावर कर देश बनाने में लगने वाले मधु को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि है

मधु जी को हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत से बड़ा लगाव था। उनके घर शास्त्रीय संगीत एल पी रिकॉर्ड पर बजता रहता या संगीत समारोह में यथासम्भव जाते। हाथरस संगीत कार्यालय से संगीत की किताबें मंगवाते। उन जैसे राजनेता अब कितने हैं? मधु लिमये जी की जन्मशती पर मधु जी के व्यक्तित्व को हम समझने की कोशिश कर सकते हैं। उनकी रचनाओं को पढ़ सकते हैं... और फिर बहुत कुछ ग्रहण भी कर सकते हैं। 

शायद उन जैसी शख्सियत के लिए ही शायर ने लिखा था-

'अजीब आदमी था वो। 

वो मुफलिसों से कहता था 

कि दिन बदल भी सकते हैं

वो जाबिरों से कहता था

तुम्हारे सर पे सोने के जो ताज हैं

कभी पिघल भी सकते हैं।'

मधु लिमये जी के अनन्य सहयोगी रहे प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक व राजनेता श्री रघु ठाकुर कहते हैं कि नेता वही जो देश के लिए खुद को मिटा दे। नेता की सम्पत्ति बढ़े तो देश मिटता है, और नेता जब खुद को मिटाए तो देश बनता है। 

मधु लिमये जी ऐसे ही आदर्श नेता थे जिन्होंने देश को बनाने के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर किया। 










लेखक अनिल त्रिपाठी वरिष्ठ पत्रकार