कुछ भी नही

न कोई शिकवा

न कोई शिकायत।

न कोई दर्द

न कोई हमदर्द।

न कोई अपना

न कोई पराया।

न कोई सुख

न कोई दुख।

न कोई चोर

न कोई शोर।

न कोई राही

न कोई हमराही।

न कोई जीत

न कोई हार।

न कोई रक्षक

न कोई भक्षक।

राजीव डोगरा

कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

rajivdogra1@gmail.com