ना तू समझा और ना मैं समझ पाई

तेरी चिकनी-चुपडी़ बातों को समझ नहीं पाई

दिल बहलाने तू आया या मैं तुझे बुलाई

ना तू समझा और ना मैं समझ पाई--2

तेरी चिकनी-चुपडी़ बातों को समझ नहीं पाया

मेरे प्यार के झांसे में तू आई या मैं आया

ना तू समझी और ना मैं समझ पाया-2

ख्यालों में अक्सर तुम आते हो

जाते-जाते दिल का तार जोड़ जाते हो

मैं तेरी जज्बातों में उलझ जाती हूं

प्यार का पैगाम छोड़ जाते हो

बेपनाह मोहब्बत करता हूं जानू

आज तक ये कह नहीं पाया

तू तो समझ गई,मैं समझ नहीं पाया--2

हो तुम बुद्धू बिल्कुल ही अनाड़ी

समझती हूं तुझको,हो मंजे हुए खिलाड़ी

जब-जब आए मेरे दर पे तुम

लेने लगती अंगड़ाई ये फिजाएं

मेरी धड़कनों में इस कदर घुले-मिले हो

दिल की बातें लबों तक कैसे लाएं

देख न लेती इक झलक तुझको

उस रात करवट बदलते रात बिताई

दिल बहलाने तू आया या मैं तुझे बुलाई

ना तू समझा और न मैं समझ पाई

तेरी चिकनी-चुपडी़ बातों को समझ नहीं पाई

दिल बहलाने तू आया या मैं तुझे बुलाई

ना तू समझा और ना मैं समझ पाई

बेपनाह मोहब्बत करता हूं जानू

आज तक कह नहीं पाया

तू तो समझ गई मैं समझ नहीं पाया

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राजेंद्र कुमार सिंह

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