मानवता का मान हो..

दया प्रेम करुणा का स्वभाव

होता स्वच्छ मन में प्रादुर्भाव।

इंसानियत से इंसान बनता।

नियति जो सत्कर्म में पलता।।

हर जीवों पर दयाभाव दिखा।

असल मानवता का फर्ज निभा।।

विश्वास हो, न अभिमान हो।

मानवता का मान हो...


छल-कपट से भरती धरती

कब तक भार उठाएगा?

मानव सभ्यता का विनाश।

एक दिन भूचाल आ जाएगा।

अमन चैन को तरसती धरा।

मची है जग में हाहाकार।।

हृदय विदारक घटनायें

इंसानियत होती शर्मसार।।


लोभ-लालच, साजिस-छल।

बाहुबली का बाहुल बल।।

द्वेष घृणा नफरत मन का क्रोध।

मानवता का कब होगा बोध?

कर नेकी का कर्म ऐसा।

तेरे कर्म का सम्मान हो।

मानवता का मान हो..

मानवता का मान हो..


देवप्रसाद पात्रे

मुंगेली छत्तीसगढ़

मो. न. 9300085203