तुम्हारे बाद

लोगो से सुना है कि किसी के जाने के बाद कुछ नही बदलता। सब यूँ ही चलता रहता है। लोग कहते थे तो मैं भी मान लेती थी, लेकिन जब से तुम गई हो माँ, तब से ये बात मेरे लिए आधी झूठी हो गई है, हाँ आधी झूठी!

 ये सच है कि किसी के जाने के बाद कुछ रुकता नहीं सब चलता रहता है लेकिन वो जाने वाला जिसके सबसे करीब होता है जिसे इस भरी दुनिया मे अकेला छोड़ गया होता है उसके लिए चलने की रफ्तार धीमी हो जाती है, तुम्हारे जाने के बाद मेरे लिए समय की रफ्तार धीमी हो गई है।

        तुम्हारे जाने के बाद मेरा साल बहुत धीमे गुजर रहे हैं। यूँ हाल है कि मेरे जहन को तुमहारी यादों ने कस कर जकर लिया हो, उन्हें छोड़ना ही न चाह रहा हो। तुम्हारे बाद मेरी ये मुस्कुराते रहने की आदत ही मेरी सबसे बड़ी दिक़्क़त बन गई। इस मुस्कुराते चेहरे की उदासी लोग झट से पकड़ लेते हैं और कहते है हौसला रख! मन करता है चिल्ला के कह दूँ, नही रख पाती मैं हौसला, कैसे रखूँ हौसला? जिस उम्र तक आते-आते एक माँ अपनी बेटी को अपने सपनो को साकार करने में साथ देती है उस उम्र में मैं बस तुम्हारी यादो में रह गयी। बस तुम्हारे बाद जैसे जिंदगी का स्वाद ही चला गया, घर के कोने कोने में मुझे तुम दिखती हो। लगता है अभी मुस्कुराते हुए आओगी और मेरा नाम लोगी।

       सब अपने कहते हैं कि तू अब बड़ी हो गयी है, खुद को संभाल सकती है। तो क्या मुझे अब रोने तक का हक नही? मैं एक बार रोना चाहती हूँ खुल के पर कोई कंधा वैसा नहीं मिल रहा। कोई जगह नहीं है जहां मैं जिंदगी की लड़ाई खुल कर लड़ने के लिए खुद को तैयार कर सकूँ। हो सके तो किसी दिन चली आओ और अपने सामने खुल के रोने दो। मुझे निकाल लेने दो मन का सारा दुःख!

        तुम्हारा न होना बहुत खलता है। कभी कभी लगता है जैसे बिना रूह के चल रही हूँ। आज एक साल हो गए तुम्हे गए हुए लेकिन लगता है जैसे अब भी पास हो तुम मेरे। मुझे हमेशा ऐसा ही लगेगा क्योंकि मैंने जो खोया है उसका घाटा किसी डायरी के पन्नो पर नहीं लिखा जा सकता। तुम वहां चली गयी हो जहां से मैं चाह कर भी तुम्हे वापस नही बुला सकती। अब बस ये शब्द मेरा शायद तुम्हारे पास ये पहुँच जाए। ईश्वर तुम्हारी रूह को सुकून दे और मेरी रूह में तुम्हे हमेशा जिंदा रखे!

-- रीमा सिंह

हावड़ा, पश्चिम बंगाल