भागवत कथा प्राणी के मोक्ष का मार्ग है-आचार्य पं०्वृजेश कुमार पाण्डेय

(गौरीशंकर पाण्डेय सरस) 

खड़ौरा गांव में चल रहे भागवत कथा के दूसरे दिन चला धुंधकारी और गौकर्ण कथा प्रसंग।

दुल्लहपुर/गाजीपुर। क्षेत्र के खड़ौरा गांव में चल रही संगीतमय भागवत कथा के दूसरे दिन  आचार्य पं०वृजेशकुमार पाण्डेय (व्यासजी)के मुखारविंद से बह रही भक्ति ज्ञान वैराग्य के साथ साथ तारण की रसमयी कथा का लोगों ने देर रात्रि तक खूब आंनद उठाया।व्यास ने धुंधकारी और गौकर्ण की कथा का पान कराते हुए कहा कि झगड़ालू स्त्री और नालायक पुत्र परिवार का सर्वनाश और जीवन को कष्टदायक बना देते हैं। प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि दक्षिण भारत में तुंगभद्रा नदी के तट पर एक नगर था।

जिसमें वेद पारंगत आत्मदेव नामक ब्राह्मण व्यक्ति रहता था।उसकी पत्नी धुंधुली बहुत सुंदर होती हुई भी स्वभाव से क्रूर और झगड़ालू थी।घर में सभी प्रकार के सुख के बावजूद पत्नी से त्रस्त और संतान सुख से बंचित था।ढलती उम्र और संतान सुख के अभाव में चिंतित और दुःखी रहता था। जिसके कारण अपना प्राण तक त्यागने का निश्चय कर लिया। निष्फल जीवन से उदास ब्राह्मण द्वारा आत्महत्या करने की निश्चयात्मक भावना को देखते हुए एक संन्यासी ने आत्महत्या का जब कारण पूछा तो ब्राह्मण ने कहा कि मैं संतान विहिन हूं।मेरे द्वारा पालतू मेरी गाय भी बांझ है। मेरे द्वारा लगाए वृक्ष में न  तो फूल लगते हैं न तो फल आदि आदि।

संत ने ब्राह्मण के ललाट की रेखाएं पढ़कर समझ लिया कि इस जन्म में तो क्या अगले सात जन्मों तक भी संतान सुख नहीं मिलने वाला। ब्राह्मण की दुखित आत्मा को संतुष्ट करते हुए अपनी झोली से फल  प्रदान करते हुए स्त्री को खिलाने को कहा परन्तु ब्राह्मण की स्त्री ने तर्क और कुतर्क के चक्कर में पड़ कर फल का भक्षण नहीं किया और चोरी छिपे संत द्वारा प्रदत्त फल अपनी पालतू गाय को खिला दिया। 

और अपनी गर्भवती बहन के बहकावे में आकर स्वयं गर्भवती होने का ढोंग रच लिया।समय के अंतराल ने करवट बदला और ब्राह्मणी को धुंधकारी और गाय को गोकर्ण प्राप्त हुआ। गौकर्ण तो सद- संस्कार पूर्ण और भगवद्भक्ति में अनुरक्त रहने वाला था लेकिन धुंधकारी तो माता पिता को कष्ट देने वाला,मदीरा का पान करने वाला ,बेश्यागामी बन गया। जिसके चलते जहां पिता घर त्याग कर वन को चले गए वहीं मां ने कूआं में कूद कर आत्महत्या कर ली। अंततोगत्वा परिणाम यह निकला कि बेश्याओं ने  धुंधकारी को रस्सी से बांध कर जान लेली।

 और प्रेत योनि को प्राप्त किया। परन्तु विद्वान ब्राह्मण भाई गोकर्ण द्वारा भागवत कथा श्रवण कराए जाने के कारण स्वर्ग में चला गया। भागवत कथा को सरस और अनुरागमयी बनाने में हारमोनियम पर  रामचरित मानस के चर्चित गायक पियूष कुमार पांडेय, तबला पर हनुमान प्रसाद पांडेय, तथा पैड पर साथ निभा रहे हैं।इस मौके पर कथा आयोजक श्यामा चरण पाण्डेय, हीरा लाल पाण्डेय,मोती लाल पाण्डेय, अजय कुमार पांडेय, तथा गांव क्षेत्र के संभ्रांत नागरिक श्रद्धालु भक्त जन उपस्थित रहे।