पावभाजी वाली

राधा का पति एक किसान था। साथ में वह सब्जी का ठेला भी लगाया करता था। उसके दो छोटे बच्चे थे ,माही और मोहन पूरा परिवार खुशहाल था, बस कभी-कभी राधा के पति सोहन को लगता था कि उसके पास धन की कमी है। वह अपने बच्चों को सब ऐशोआराम नहीं दे पा रहा ,जो वह देना चाहता था ।इसके लिए मैं भरपूर मेहनत करता है।

   अपनी पत्नी से भी बोलता रहता है, उसकी पत्नी राधा उसे समझाते हुए कहती है। कि तुम परेशान क्यों होते हो हमारे पास एक अच्छा परिवार है। और देखो बच्चे भी प्यारे हैं कोई बात नहीं थोड़ा पैसा कम है तो क्या है हम सब मिल जुल कर रहते हैं।

    लेकिन सोहन के दिमाग में ज्यादा पैसा कमाने की बात  घूमती रहती है कुछ समय बीतता है 1 दिन सोहन शहर में सब्जियां बेचने जा रहा था अचानक से ट्रक आता है और सोहन का एक्सीडेंट हो जाता है लोग सोहन को अस्पताल में ले जाते हैं वहां उसका इलाज होता है उसकी पत्नी राधा

को खबर कर दी जाती है राधा अपने बच्चों के साथ अस्पताल आती है। डॉ राधा से बोलते हैं देखो राधा मैं तुम्हें किसी धोखे में नहीं रखना चाहता तुम्हारे पति के पैरों में काफी चोट लगी है और शायद वह आगे कभी चल भी ना पाए राधा दुखी होती है। परंतु भगवान की इच्छा के आगे कर भी क्या सकती है वह सोहन को घर ले आती है उसकी देखभाल करनी शुरू कर देती हैं धीरे-धीरे उनके पास जमा पूंजी खत्म हो जाती है अब राधा के सामने समस्या आती है कि वह अपने घर का खर्च कैसे चलाएं। और सोहन का इलाज कैसे कराए?

राधा अपने जेवर इकट्ठे करती है, और बेचने के लिए जाने लगती हैं उसके दोनों बच्चे पास आकर बोलते हैं मांँ मांँ आप यह जेवर मत बेचिए!

पिताजी ने आपके लिए बहुत प्यार से बनवाए हैं इन्हीं आप पहनिए हम सब मिलकर कुछ ऐसा काम करते हैं जिससे घर की परेशानी दूर हो जाए और पैसे का भी रास्ता बन जाए।

माही और मोहन एक साथ बोलते हैं ‌आप पावभाजी बहुत अच्छी बनाते हो क्यों ना हमें एक ठेला लगाएं।

मां कोउन दोनों की बात समझ आ जाती हैं पाव भाजी का सामान लाने की तैयारी करते हैं।

राधा पाव भाजी बनाती है और वह ठेला लगाकर बाजार में खड़े हो जाते हैं। राधा बोलती है मोहन में पावभाजी बनाऊंगी तुम ग्राहकों को देना और माही तुम लोगों की प्लेट उठाकर साफ करना।

  उधर से एक ग्राहक निकलता है बोलता है अरे कितनी अच्छी खुशबू आ रही है एक प्लेट पावभाजी देना

मोहन उनको एक प्लेट पावभाजी दे देता है वह बोलते हैं पावभाजी तो बड़ी स्वादिष्ट बनी है तीनप्लेट पैक कर दो

मोहन तीनप्लेट पावभाजी पैक कर देता है।

धीरे-धीरे और ग्राहक उनके पास आने लगते हैं उनकी अच्छी कमाई हो जाती है।

मोहन घर आकर पिताजी यह लीजिए हमारी आज की पहली कमाई

सोहन बोलता है राधा तुम कितनी मेहनत करती हो मैं कितना लाचार हो गया हूं मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा राधा उसको काफी समझाती है। राधा बोलती है कोई बात नहीं तुम बीमार हो जब ठीक हो जाओगे तब मेहमत कर लेना

अब धीरे-धीरे वह है रोज पाव भाजी का ठेला लगाते और उनकी कमाई अच्छी होने लगी लक्ष्मी उन पर मेहरबान होने लगी।

1 दिन सोहन बैठे-बैठे रोने लगा मांँ मांँ मुझे माफ कर दो परिवार ही सबसे अच्छा धन होता है मेरे पैर मुझे वापस दे दो ।मेरे पैर ठीक कर दो मां मैं कभी अब धन का लालच नहीं करूंगा जितना भी मिलेगा उसी में संतोष करूंगा वह रोता जाता है और प्रार्थना करता जाता है देवी माता उसके सामने आती हैं और बोलती हैं कि तुम परिवार की महत्व को अच्छी तरह समझ गए हो।

चलो अब तुम्हारे पैर ठीक कर देती हूं सोहन वापस शहर में अपने आप को अपने सब्जी के ठेले के साथ खड़ा पाता है।

शाम को वह अपने घर आता है और अपनी पत्नी और बच्चों को गले लगा लेता है बोलता है तुम ही मेरा सच्चा धन्

हो।

सारा परिवार सोहन को अपने पैरों से चलते हुए देख कर बहुत खुश होता है और देवी मैया का धन्यवाद अदा करते हैं सब मिलकर खुशी-खुशी रहने लगते हैं बच्चे वापस पढ़ने जाने लगते हैं अब सोहन को परिवार के महत्व का पता लग गया था इसलिए वह अपने परिवार के साथ समय ज्यादा बिताने लगा।

ध्यान रखिए  थोड़ा परिवार को ध्यान दीजिए समय है बीत जाएगा लेकिन परिवार जो आपका इंतजार करता है आपके साथ सुख दुख में खड़ा रहता है उसका ध्यान रखना आपका ही फर्ज है इसलिए वक्त रहने परिवार की कीमत को पहचानिए थोड़ा टाइम परिवार के साथ अवश्य बिताइए।

                रचनाकार ✍️

                मधु अरोरा