महिला विभाग द्वारा महिलाओं के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित

मऊ जनपद में जिला प्रोबेशन अधिकारी समर बहादुर सरोज ने बताया कि पति की मृत्यु उपरांत निराश्रित महिला सहायक अनुदान पेंशन योजना के तहत पति की मृत्यु के उपरांत निराश्रित महिला को प्रति माह 1000 की दर से प्रत्येक तिमाही 3000 की सहायता दी जाती है। आवेदिका एवं उसके परिवार की वार्षिक आय समस्त स्रोतों से रुपया दो लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। जनपद में इस योजना से वर्तमान में कुल 25095 लाभार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत कन्या सुमंगला योजना में छः श्रेणियों में धनराशि दी जाती है।

प्रथम श्रेणी बालिका के जन्म होने पर 2000, द्वितीय श्रेणी बालिका के 1 वर्ष तक के पूर्ण टीकाकरण के उपरांत 1000, तृतीय श्रेणी कक्षा प्रथम में बालिका के प्रवेश के उपरांत 2000 रुपए, चतुर्थ श्रेणी कक्षा छः में बालिका के प्रवेश के उपरांत 2000, पंचम श्रेणी कक्षा 9 में बालिका के प्रवेश के उपरांत  3000, षष्टम श्रेणी में ऐसी बालिकाएं जिन्होंने कक्षा 10वीं/12वीं कक्षा उत्तीर्ण करके स्नातक अथवा 02 वर्षीय या अधिक अवधि के डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लिया हो उसे 5000 की धनराशि दी जाती है। इस योजना हेतु लाभार्थी की परिवारिक वार्षिक आय अधिकतम 03 लाख होनी चाहिए। किसी परिवार की अधिकतम दो ही बच्चियों को योजना का लाभ दिया जाता है। इस योजना से जनपद में अब तक कुल 14345 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है।

पति की मृत्युपरांत निराश्रित महिला की पुत्री हेतु शादी अनुदान योजना के अंतर्गत निराश्रित महिला की पुत्री के विवाह हेतु एकमुश्त 10000 की सहायता दी जाती है। 

विधवा से पुनर्विवाह दंपत्ति पुरस्कार योजना के अंतर्गत दंपत्ति को एकमुश्त रूपये 11000 की धनराशि पुरस्कार स्वरूप दी जाती है। जिसके लिए विधवा की उम्र 35 वर्ष से अधिक न हो तथा लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम न हो शादी करने वाली महिला के पूर्व पति के मृत्यु प्रमाण पत्र का होना आवश्यक है।

दहेज से पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता योजना के तहत पीड़िता को 2500 का अनुदान दिया जाता है। पत्नी द्वारा पति के खिलाफ थाने पर प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज की छायाप्रति व माननीय न्यायालय में मुकदमा पंजीकृत की छायाप्रति देना आवश्यक होता है। 

दहेज से पीड़ित महिलाओं को आर्थिक सहायता योजना इस योजना के अंतर्गत पीड़िता को 125 प्रतिमाह अनुदान दिया जाता है।

उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष के अंतर्गत पीड़ितों को आर्थिक क्षतिपूर्ति धनराशि उनके सी0वी0एस0 खाते में दी जाती है। 

समेकित बाल संरक्षण योजना के अंतर्गत संस्थागत देखरेख से गैरसंस्थागत देखरेख को प्राथमिकता दी जाती है, अर्थात संस्थागत देखरेख से बच्चों को परिवार आधारित देखरेख में हस्तांतरित किए जाने हेतु ऐसे बच्चे जिनके कम से कम एक अभिभावक जीवित हों को समेकित बाल संरक्षण योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया जाता है। 

ऐसे परिवार जो आर्थिक विपन्नता के कारण अपने बच्चों की अपेक्षित देखरेख न कर पा रहे हो उन्हें परिवार आधारित से लाभान्वित किया जाएगा एवं जिला बाल संरक्षण इकाई, किशोर, न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, जिले के प्रत्येक थानों पर विशेष किशोर पुलिस इकाई, चाइल्ड लाइन सेवाओं के माध्यम से 18 वर्ष से कम उम्र के बालकों के संरक्षण का कार्य किया जाता है। किसी भी योजना की जानकारी/लाभ पाने के लिए जिला प्रोबेशन कार्यालय कलेक्ट्रेट मऊ में संपर्क करें।