श्रीलंका डिफॉल्ट: पहली बार कर्ज चुकाने में हुआ नाकाम, महंगाई दर 40 फीसदी पर पहुंचने की चेतावनी

श्रीलंका अपने इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है और गुरुवार को पहली बार वह डिफॉल्ट हो गया। यानी वह कर्ज चुकाने से चूक गया। बता दें कि चीन समेत कई देशों के भारी कर्ज के जाल में फंसे द्विपीय देश में इस समय हालात बदतर हो चुके हैं। जहां सरकार आर्थिक मंदी को रोकने के लिए जद्दोजहद कर रही है, तो दूसरी ओर यहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिससे राजनीतिक संकट भी गहरा गया है। 

एक रिपोर्ट में कहा गया कि श्रीलंका अपने इतिहास में पहली बार डिफॉल्ट हो गया है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर नंदलाल वीरसिंघे ने गुरुवार को एक ब्रीफिंग में कहा कि नीति निर्माताओं ने लेनदारों को हरी झंडी दिखाई थी कि जब तक ऋण का पुनर्गठन नहीं हो जाता, तब तक राष्ट्र भुगतान नहीं कर पाएगा और देश कर्ज भुगतान कर पाने में असमर्थ रहा है। बता दें कि 78 मिलियन डॉलर का कूपन भुगतान मूल रूप से 18 अप्रैल को को करना था, जिसे 30 दिन की छूट अवधि दी गई थी और यह अवधि बुधवार को समाप्त हो गई।

वीरसिंघे ने अनुमान जताते हुए कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच पहले से ही श्रीलंका भारी उथल-पुथल में फंसा हुआ है और आने वाले महीने में देश की महंगाई दर 40 फीसदी तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि श्रीलंकाई मुद्रा में जारी गिरावट और भयाभह हुए आर्थिक हालातों के चलते देश में खाद्य और ईंधन आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। महंगाई में आए जबरदस्त उछाल के चलते जनता परेशान है और उसका गुस्सा हिंसक विरोध का रूप ले चुका है। सरकार को पिछले महीने घोषणा करते हुए कहा था कि वह आवश्यक वस्तुओं के लिए नकदी को संरक्षित करने के लिए अपने 12.6 अरब डॉलर के विदेशी ऋण के भुगतान को रोक देगी।

इस संबंध में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि 1948 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से यह देश का पहली ऋण चूक है। इसके बांड इस साल दुनिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वालों में से हैं। यहां बता दें कि श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार लगभर खत्म हो चुका है और जरूरी सामानों का आयात करने में भी द्विपीय देश असमर्थ हो रहा है। देश में ईंधन से लेकर बिजली समेत खाने-पीने का भी संकट गहरा गया है और इसे रोकने में सरकार की तमाम कोशिशें नाकाफी साबित हो रही है।