पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर घमासान, मोदी की नसीहत पर राहुल का पलटवार

नई दिल्ली : पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों को लेकर जहां एक ओर देश की जनता परेशान है, तो वहीं दूसरी ओर सरकार और विपक्ष के बीच भी घमासान छिड़ा हुआ है। एक ओर जहां प्रधानमंत्री ने जनता को महंगे पेट्रोल-डीजल से राहत देने के लिए राज्यों को नसीहत दी, तो अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर जबरदस्ती का आरोप लगाते हुए पलटवार किया है। 

एक ओर जहां मंहगे ईंधन की मार झेल रही देश की जनता को राहत देने के मामले में केंद्र अपनी पीठ थपथपा रही है और कीमतों में बढ़ोतरी के लिए राज्यों के सिर ठीकरा फोड़ रही है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी और पेट्रोलियम मंत्री के निशाना साधने पर पलटवार किया है। राहुल गांधी ने कहा है सरकार हर चीज के लिए सिर्फ राज्यों को जिम्मेदार ठहराते हुए अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश करती है। राहुल ने ट्वीट कर लिखा कि ईंधन की ऊंची कीमतों के लिए राज्य दोषी, कोयले की कमी के लिए राज्य दोषी और ऑक्सीजन की कमी के लिए भी राज्य दोषी। 

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य सरकारों द्वारा वैट वसूलने के बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि सभी ईंधन करों का 68 फीसदी तो केंद्र सरकार द्वारा लिया जाता है। फिर भी, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी जिम्मेदारी से बचते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि मोदी का संघवाद सहयोगी नहीं है, यह पूरी तरह से जबरदस्ती है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा के दौरान पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर बयान दिया था। 

बता दें कि बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकारों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में रियायत देने की नसीहत दी थी। पीएम ने कहा था कि पिछले साल नवंबर में केंद्र ने उत्पाद शुल्क में कटौती की थी और राज्य सरकारों से भी वैट कम करने का आग्रह किया था। लेकिन, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, केरल, झारखंड और तमिलनाडु ने इस पर ध्यान नहीं दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे जनता के साथ अन्याय बताया था।

प्रधानमंत्री की इस नसीहत के तुरंत बाद ही सियासी घमासान शुरू हो गया। कांग्रेस ने तो केंद्र सरकार से उत्पाद शुल्क से जुटाए पैसों का हिसाब तक मांग डाला। कांग्रेस ने कहा कि यूपीए शासल काल में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 9.48 रुपये और डीजल पर 3.56 रुपये था। जो कि अब भाजपा सरकार में बढ़कर पेट्रोल पर 27.90 रुपये और डीजल पर 21.80 रुपये हो गया है। मोदी सरकार को पिछले आठ साल में ईंधन पर उत्पाद शुल्क से जुटाए गए 27 लाख करोड़ रुपये का हिसाब जनता को देना चाहिए। 

देश के कई राज्यों, खासतौर पर भाजपा शासित राज्यों ने केंद्र के उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद अपने यहां वैट घटाया था। हालांकि, इस बीच कुछ गैर-भाजपा शासित राज्यों ने भी कटौती की थी, जबकि कई ने प्रधानमंत्री की अपील को मानने से इनकार कर दिया था। सबसे कम वैट के मामले में लक्ष्यद्वीप अव्वल है, यहां पर शून्य वैट है, जबकि सबसे ज्यादा वैट तेलंगाना सरकार वसूल कर रही है।