जिज्ञासा

जिज्ञासा में निहित जीवन का विकास,

जिज्ञासा में है नवचेतन का आभास।


बिन जिज्ञासा हम पाषाण युग में ही रह जाते,

कुंठित होती  चेतना नवनिर्माण से वंचित रह जाते।


जीवन के हर पड़ाव पर जिज्ञासा होती है,

कुलांचे भरती मनुष्य में,नव सृजन जन्म लेती है।


गिरते सेव की जिज्ञासा ने गुरुत्वाकर्षण नियम को जन्म दिया।

बाल सुलभ मन न्यूटन का इसके बल पर प्रखर हुआ।


सुई से लेकर अट्टालिकाएँ जिज्ञासा से सम्भव हुआ,

बिन इसके जीवन नहीं इससे सभ्यता आरम्भ हुआ।


जब यह बढ़ती सही दिशा में, ऊर्जावान बनाती है,

जीवन में ताक झाँक की जिज्ञासा मन कलुषित कर जाती है।


मनुज जीवन मिलता कई योनियों में भटक कर,

व्यर्थ ना गंवाओ इसे आलोचना में पड़कर।


अपनी जिज्ञासा का सही उपयोग कर 

नित नए निर्माण करो,

साहित्य हो या विज्ञान जगत सब में ऊंचा नाम करो।


                   रीमा सिन्हा (लखनऊ)